भारतीय आम की मिठास अब केवल देश तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि दुनिया भर के बाजारों में अपनी एक खास पहचान बनाती जा रही है। आम को लेकर विदेशों में बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि भारतीय आम की गुणवत्ता और स्वाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है, और यही वजह है कि यह फल अब लगातार नए-नए बाजारों तक अपनी पहुंच बना रहा है।
इस बढ़ती लोकप्रियता की एक झलक दुबई में देखने को मिल रही है, जहां भारतीय आम महोत्सव इस समय आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस तरह के आयोजन न सिर्फ भारतीय आम की अलग-अलग किस्मों को विदेशी उपभोक्ताओं के सामने पेश करते हैं, बल्कि भारत के इस खास फल की पहचान को विदेशी जमीन पर और मजबूत भी बनाते हैं।
इसी कड़ी में झारखंड का सिमडेगा भी सुर्खियों में है। सिमडेगा से निकले आम्रपाली आम अब ब्रिटेन तक पहुंच रहे हैं, जो इस इलाके के किसानों और यहां की उपज के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। एक छोटे से क्षेत्र से निकलकर आम्रपाली आम का इतनी दूर के बाजार तक पहुंचना भारतीय आम की बढ़ती साख को दर्शाता है।
ब्रिटेन के अलावा भारतीय आम ने यूरोप के एक और देश बेल्जियम में भी अपनी जगह बना ली है। यहां भारतीय आम प्रमुख रिटेल स्टोर्स तक पहुंच चुके हैं, यानी अब वे बड़े और जाने-माने स्टोर्स की अलमारियों तक जा पहुंचे हैं, जहां से आम आदमी आसानी से इन्हें खरीद सकता है। यह भारतीय आम के लिए यूरोपीय बाजार में एक मजबूत मौजूदगी की ओर इशारा करता है।
वहीं खाड़ी देशों में भी भारतीय आमों की धूम मची हुई है। इन देशों में भारतीय आमों की दर्जनों किस्में उपभोक्ताओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। इतनी बड़ी संख्या में किस्मों का मौजूद होना यह बताता है कि भारतीय आम अपनी विविधता के दम पर भी विदेशी ग्राहकों के बीच एक अलग पसंद बनता जा रहा है।
कुल मिलाकर, दुबई के आम महोत्सव से लेकर ब्रिटेन, बेल्जियम और खाड़ी देशों के बाजारों तक, भारतीय आम की पहुंच लगातार बढ़ती जा रही है। इस तरह भारतीय आम की मिठास धीरे-धीरे दुनिया भर के बाजारों में अपनी पहचान को और गहरा करती जा रही है, और यह फल भारत की एक मीठी पहचान बनकर सीमाओं के पार अपनी जगह बना रहा है।
