दक्षिण-पश्चिम मानसून की भारी बारिश ने असम को बाढ़ की गंभीर चपेट में ले लिया है। पहाड़ी इलाकों से अचानक आए पानी ने मैदानी क्षेत्रों को जलमग्न कर दिया, जिससे राज्य का बड़ा हिस्सा डूब गया है। जो बारिश एक ओर किसानों के लिए राहत बनकर आई थी, वही अब पहाड़ी और निचले बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
अधिकारियों के अनुसार राज्य के 257 गाँव पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। प्रभावित लोगों को उनके घरों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है, जहाँ राहत व्यवस्था की जा रही है। बाढ़ का पानी लगातार नए इलाकों तक फैल रहा है, जिससे स्थानीय प्रशासन के सामने राहत और पुनर्वास का बड़ा काम खड़ा हो गया है।
बाढ़ ने खेती को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाया है। शुरुआती आकलन के मुताबिक करीब 4,278.52 हेक्टेयर फसल क्षेत्र पानी में डूबकर बर्बाद हो गया है, जिससे आने वाले महीनों में किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। खड़ी फसल के जलमग्न होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा है।
नुकसान केवल खेतों तक सीमित नहीं है। आपदा से 76,161 से ज़्यादा मवेशी और पोल्ट्री भी प्रभावित हुए हैं, जो पशुपालन पर निर्भर परिवारों के लिए एक और बड़ी मार है। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में सक्रिय हैं और फँसे हुए लोगों तथा मवेशियों को सुरक्षित निकालने में जुटे हुए हैं।
इसी बीच राहत कार्यों और नुकसान का जायज़ा लेने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज से असम दौरे पर रहने वाले हैं। दौरे के दौरान वे हवाई और ज़मीनी सर्वेक्षण करेंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन इलाकों में बाढ़ का सबसे अधिक असर पड़ा है और कहाँ राहत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
प्रशासन राहत और बचाव में पूरी तरह जुटा हुआ है, लेकिन मौसम विभाग और स्थानीय अधिकारियों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन असम और पूरे पूर्वोत्तर के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं। लगातार हो रही बारिश के बीच नदियों के जलस्तर पर नज़र रखी जा रही है, और प्रभावित आबादी तक समय पर मदद पहुँचाना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है।
