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पुंछ के सुरनकोट में बादल फटा, तीन शव बरामद, कई लापता

पुंछ के सुरनकोट में बादल फटा, तीन शव बरामद, कई लापता

जम्मू-कश्मीर के पुंछ ज़िले के सुरनकोट इलाके में बीती रात बादल फटने से तबाही मच गई, जहां अब तक तीन लोगों के शव बरामद किए गए हैं और शुरुआती जानकारी के मुताबिक करीब आधा दर्जन लोग लापता बताए जा रहे हैं। तेज़ बारिश के बाद नदियों और नालों में अचानक आए उफान ने रास्ते में आई हर चीज़ को अपनी चपेट में ले लिया। मौके पर जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना की टीमें राहत और बचाव अभियान में जुटी हुई हैं और लापता लोगों की तलाश जारी है। पड़ोसी ज़िले राजौरी में भी भारी बारिश का असर देखा गया, जहां तेज़ बहाव ने सबसे पहले सड़कों पर खड़े और गुज़र रहे वाहनों को अपनी चपेट में लिया। हताहतों की संख्या अभी शुरुआती है और तलाशी अभियान आगे बढ़ने के साथ इसमें बदलाव संभव है।

जम्मू-कश्मीर के पुंछ ज़िले के सुरनकोट इलाके में बीती रात बादल फटने से भारी तबाही मच गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस आपदा में तीन लोगों के शव अब तक बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब आधा दर्जन लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अचानक आई इस आफ़त ने पहाड़ी इलाके में रह रहे लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया और देखते ही देखते हालात बेहद गंभीर हो गए।

स्थानीय जानकारी के अनुसार बादल फटने के बाद बहुत तेज़ बारिश हुई, जिससे इलाके की नदियों और नालों में अचानक ज़बरदस्त उफान आ गया। पानी का बहाव इतना तेज़ था कि रास्ते में जो कुछ भी आया, वह उसे अपने साथ बहा ले गया। यही तेज़ बहाव कई लोगों को अपनी चपेट में ले गया, जिनमें से तीन के शव बरामद हो पाए हैं और बाकी की तलाश की जा रही है।

घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना की टीमें प्रभावित इलाके में पहुंचकर लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार बने हुए ख़तरे के बीच बचाव दल पानी के तेज़ बहाव और मलबे के बीच से लोगों को खोजने की कोशिश कर रहे हैं।

इसी दौरान पड़ोसी ज़िले राजौरी में भी भारी बारिश का असर साफ़ देखा गया। यहां तेज़ बहाव ने सबसे पहले सड़कों पर खड़े और गुज़र रहे वाहनों को अपनी चपेट में लिया, जिससे सबसे ज़्यादा नुकसान गाड़ियों को हुआ। पानी के अचानक बढ़ते स्तर ने आवाजाही को बाधित किया और स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दीं।

बादल फटने की घटनाएं पहाड़ी और हिमालयी इलाकों में इसीलिए बेहद ख़तरनाक मानी जाती हैं, क्योंकि इनमें बहुत कम समय में बहुत तेज़ बारिश हो जाती है। ऊंचाई वाले इलाकों में गिरा यह पानी संकरी घाटियों और नालों के रास्ते नीचे की ओर तेज़ी से बहता है और कुछ ही मिनटों में सामान्य दिख रहे इलाके को जलप्रलय में बदल देता है, जिससे लोगों को बचने का बहुत कम मौका मिलता है।

फ़िलहाल हताहतों की संख्या शुरुआती है और अधिकारी लगातार हालात पर नज़र बनाए हुए हैं। तलाशी अभियान आगे बढ़ने के साथ लापता लोगों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी, और यह आशंका बनी हुई है कि आंकड़े बदल सकते हैं। प्रशासन का पूरा ध्यान इस समय लापता लोगों की तलाश और प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाने पर केंद्रित है।

जम्मू-कश्मीर में मानसून के इस दौर में पहाड़ से लेकर मैदानी इलाकों तक भारी बारिश का सिलसिला बना हुआ है, और बादल फटने तथा अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाएं इस क्षेत्र के लिए बार-बार लौटने वाला ख़तरा बन चुकी हैं। ताज़ा घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि इन इलाकों में मौसम कितनी जल्दी जानलेवा रूप ले सकता है और स्थानीय लोगों को कितनी सतर्कता बरतने की ज़रूरत है।

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