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मध्य प्रदेश के शिवपुरी, ग्वालियर और जबलपुर में अगले नौ दिनों के लिए खतरनाक गर्मी का रेड अलर्ट जारी किया गया है। बालाघाट में 44 डिग्री की तपिश से एक दर्जन से अधिक चमगादड़ पेड़ों से गिरकर मर गए। इंदौर में 32 फीसदी इलाका सूखे बोरवेल पर निर्भर है और गंभीर जल संकट है।
मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी का कहर जारी है। शिवपुरी, ग्वालियर और जबलपुर सहित कई जिलों में अगले नौ दिनों के लिए खतरनाक गर्मी का रेड अलर्ट जारी किया गया है। दोपहर में ऐसा अघोषित कर्फ्यू लग जाता है कि सड़कों पर लस्सी और शिकंजी बेचने वालों के धंधे भी ठप हो चुके हैं।
बालाघाट के मोती गार्डन से दिल दहलाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। 44 डिग्री सेल्सियस की भीषण तपिश बर्दाश्त न कर पाने के कारण एक दर्जन से अधिक चमगादड़ पेड़ों से गिरकर मर गए। यह घटना बताती है कि गर्मी का प्रकोप न सिर्फ इंसानों बल्कि वन्यजीवों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है।
सूबे की आर्थिक राजधानी इंदौर में पानी का महासंकट गहराता जा रहा है। शहर का 32 फीसदी इलाका पूरी तरह से बोरवेल पर निर्भर था, जो अब पाताल में जा चुके हैं। लोग सड़कों पर बर्तन लेकर पानी की तलाश में भटक रहे हैं।
हालात इतने बदतर हैं कि लोग कपड़े धोने से बचे हुए गंदे पानी को शौचालय में इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। निर्मना की पाइपलाइन गायब है और नगर निगम और विपक्ष के बीच इस पानी के संकट पर सियासत भी शुरू हो गई है।
मध्य प्रदेश के हालात देश के अन्य हिस्सों से भी जुदा नहीं हैं। भीषण गर्मी और पानी की किल्लत ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी चरम गर्मी की घटनाएं आने वाले वर्षों में और बढ़ेंगी।