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नौतपा के पहले ही दिन राजस्थान भट्टी की तरह तप रहा है। फलौदी में पारा 47 डिग्री के पार पहुंच गया है जबकि श्रीगंगानगर में 46.5 डिग्री दर्ज किया गया। दोपहर बाद सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है लेकिन जानलेवा धूप में भी लोग रोजी-रोटी के लिए बाहर निकलने को मजबूर हैं।
नौतपा के पहले ही दिन राजस्थान भट्टी की तरह तप उठा है। फलौदी में पारा 47 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जबकि श्रीगंगानगर जिले में 46.5 डिग्री का तापमान दर्ज किया गया। ये शब्द नहीं बल्कि धधकती तस्वीरों का उबलता, खौलता और धड़कता सच है।
दोपहर बारह बजते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। लेकिन इस जानलेवा धूप में भी लोग चैन से घरों में नहीं बैठ पा रहे हैं क्योंकि पेट और जिंदगी की जंग है। रोजी-रोटी कमाने के लिए भीषण गर्मी में भी बाहर निकलना मजबूरी बन गई है।
नौतपा साल के सबसे गर्म नौ दिनों की अवधि होती है जो ज्येष्ठ माह में पड़ती है। इस दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहता है और तापमान अपने चरम पर होता है। राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में यह अवधि विशेष रूप से कठिन होती है।
गला सुखाने वाली इस गर्मी के बीच राजस्थान भीषण पानी की किल्लत से भी जूझ रहा है। राज्य में एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की कृत्रिम झील होने के बावजूद जल संकट गहरा है। कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति बाधित हो चुकी है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है। नौतपा की शेष आठ दिनों में राजस्थान के कई जिलों में पारा 48 डिग्री को छू सकता है। प्रशासन ने नागरिकों से दोपहर में बाहर न निकलने और पर्याप्त पानी पीने की अपील की है।