गुवाहाटी की नीलाचल पहाड़ी पर स्थित कामाख्या मंदिर में आज से वार्षिक अम्बूबाची मेले की शुरुआत हुई। डीडी न्यूज के बुलेटिन में दी गई जानकारी के अनुसार, यह मेला हर साल इसी स्थान पर आयोजित होता है।
यह मेला देवी कामाख्या के वार्षिक रजस्वलाकाल का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण इसे नारी शक्ति और उर्वरता के उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
मेले के दौरान कामाख्या मंदिर को कुछ समय के लिए बंद रखा जाता है और बाद में दर्शन के लिए पुनः खोला जाता है। यह परंपरा हर वर्ष अम्बूबाची मेले के साथ जुड़ी रहती है।
मान्यता के अनुसार इस अवसर पर साधकों को बड़ी शक्ति मिलती है, और यह स्थान साधना का एक बहुत बड़ा केंद्र माना जाता है। श्रद्धालुओं के लिए यह पूजा और भक्ति का प्रमुख स्थल है।
मेले को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा सकें। हर वर्ष इस मेले में जनभागीदारी लगातार बढ़ रही है।
इस तरह नीलाचल पहाड़ी पर स्थित कामाख्या मंदिर में अम्बूबाची मेले की शुरुआत के साथ श्रद्धालुओं का आना शुरू हुआ। देवी कामाख्या से जुड़ा यह वार्षिक मेला असम की एक प्रमुख धार्मिक परंपरा के रूप में मनाया जाता है।
