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भारत की मदद से बन रही मंगोलिया की पहली तेल रिफाइनरी, आर्कटिक जैसे मौसम में सिर्फ सात महीने में पूरा हुआ एक चरण

भारत की मदद से बन रही मंगोलिया की पहली तेल रिफाइनरी, आर्कटिक जैसे मौसम में सिर्फ सात महीने में पूरा हुआ एक चरण

भारत की मदद से मंगोलिया में देश की पहली तेल रिफाइनरी का निर्माण हो रहा है, जिसे लेकर उलान बाटोर से एक खास ग्राउंड रिपोर्ट सामने आई है। इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत एक बड़ा चरण सिर्फ एक वर्किंग सीजन यानी करीब सात महीने में पूरा कर लिया गया, और वह भी आर्कटिक जैसी कठिन जलवायु में, जिसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस परियोजना का महत्व सिर्फ इसकी भारी भरकम लागत तक सीमित नहीं है। रिफाइनरी के तैयार हो जाने के बाद तेल यानी पेट्रोलियम उत्पादों के मामले में दूसरे देशों पर मंगोलिया की निर्भरता काफी कम हो जाएगी, और देश की ऊर्जा सुरक्षा को नई गति मिलेगी। यह परियोजना भारत और मंगोलिया के बीच के रिश्ते को भी और मजबूत कर रही है।

भारत और मंगोलिया के बीच सहयोग की एक बड़ी मिसाल इन दिनों आकार ले रही है। भारत की मदद से मंगोलिया में उस देश की पहली तेल रिफाइनरी का निर्माण किया जा रहा है, और इसी परियोजना को लेकर राजधानी उलान बाटोर से एक खास ग्राउंड रिपोर्ट सामने आई है।

इस परियोजना की रफ्तार भी चर्चा का विषय बनी हुई है। मेगा प्रोजेक्ट के तहत एक बड़ा चरण सिर्फ एक वर्किंग सीजन में, यानी करीब सात महीने के भीतर ही पूरा कर लिया गया, जो अपने आप में एक उल्लेखनीय बात मानी जा रही है।

यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यहां का मौसम बेहद कठिन है। निर्माण का यह काम आर्कटिक जैसी कठोर जलवायु परिस्थितियों के बीच किया गया, जहां इस तरह के बड़े काम को इतने कम समय में पूरा करना आसान नहीं होता।

इस मेगा प्रोजेक्ट की अहमियत सिर्फ इसके आकार या इस पर आने वाली भारी भरकम लागत तक ही सीमित नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा रणनीतिक मकसद भी जुड़ा हुआ है, जो मंगोलिया के लिए दूरगामी रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

रिफाइनरी के तैयार हो जाने के बाद मंगोलिया की एक बड़ी निर्भरता खत्म होने की उम्मीद है। तेल यानी पेट्रोलियम उत्पादों के मामले में दूसरे देशों पर मंगोलिया की निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी, जिससे देश को अपनी जरूरतें घरेलू स्तर पर पूरी करने में मदद मिलेगी।

इसका सीधा असर मंगोलिया की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा। इस परियोजना से देश की ऊर्जा सुरक्षा को नई गति मिलेगी, और इसके साथ ही भारत की मदद से बन रही यह रिफाइनरी दोनों देशों के बीच के आपसी रिश्ते को भी और मजबूत कर रही है।

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