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मोदी ने जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई

मोदी ने जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई | AVALW News

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन 'नमो ग्रीन रेल' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। स्वदेश में विकसित यह हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन नियमित यात्री सेवा में उतरने वाली भारत की पहली ट्रेन है। दस कोच वाली इस ट्रेन में 1200 किलोवाट का हाइड्रोजन फ्यूल सेल और 27 हाइड्रोजन सिलेंडर लगे हैं, जिससे एक बार भरने पर लगभग 250 किलोमीटर की दूरी तय की जा सकती है और इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह ट्रेन जींद-सोनीपत खंड पर करीब 90 किलोमीटर के मार्ग पर सप्ताह में छह दिन चलेगी। ब्रॉड गेज नेटवर्क पर चलने वाली इसे दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन बताया जा रहा है, और इसके डिज़ाइन तथा सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय संस्था टीयूवी एसयूडी ने प्रमाणित किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन 'नमो ग्रीन रेल' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पूरी तरह स्वदेश में विकसित यह हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन नियमित यात्री सेवा में उतरने वाली भारत की पहली ट्रेन बन गई है। इस शुरुआत के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास परिचालन में हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें हैं। यह कदम स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

यह ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच के खंड पर चलेगी, जिसकी दूरी लगभग 90 किलोमीटर है। जानकारी के अनुसार यह सेवा सप्ताह में छह दिन संचालित होगी और दिन में दो फेरे लगाते हुए ट्रेन प्रतिदिन करीब 356 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। जींद-सोनीपत मार्ग को इस अत्याधुनिक ट्रेन के पहले नियमित परिचालन के लिए चुना गया है, जिससे इस क्षेत्र के यात्रियों को एक नई और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

तकनीकी दृष्टि से नमो ग्रीन रेल दस कोच वाली एक ट्रेन है, जो इसे अब तक विकसित सबसे लंबी हाइड्रोजन चालित यात्री ट्रेनों में से एक बनाती है। ट्रेन में 1200 किलोवाट क्षमता की हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रणाली और 27 हाइड्रोजन सिलेंडर लगाए गए हैं। एक बार हाइड्रोजन भरने पर यह ट्रेन लगभग 250 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है, जबकि इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है, जो इसे इस मार्ग पर नियमित यात्री सेवा के लिए उपयुक्त बनाती है।

इस ट्रेन की एक और खास बात इसका आकार है। ब्रॉड गेज नेटवर्क पर चलने वाली इसे दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन बताया जा रहा है। ट्रेन के डिज़ाइन और सुरक्षा मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्था टीयूवी एसयूडी द्वारा प्रमाणित किया गया है। इस प्रमाणन से यह पुष्टि होती है कि स्वदेश में तैयार की गई यह ट्रेन तय सुरक्षा और गुणवत्ता के मानकों पर खरी उतरती है, जो इसके नियमित परिचालन के लिए महत्वपूर्ण है।

हाइड्रोजन ट्रेन के परिचालन के लिए जींद में एक समर्पित हाइड्रोजन भंडारण और रिफ्यूलिंग सुविधा भी तैयार की गई है। इस सुविधा को संपीड़ित गैस के भंडारण और वितरण के लिए पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन यानी पेसो से लाइसेंस प्राप्त है। यहां लगे हाइड्रोजन कंप्रेशन सिस्टम के जरिए ट्रेन को ईंधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिदिन करीब 300 किलोग्राम हाइड्रोजन की खपत होती है, ताकि ट्रेन का परिचालन बिना किसी रुकावट के जारी रह सके।

यह परियोजना 'ग्रीन ट्रांसपोर्टेशन मिशन' और 'मेक इन इंडिया' पहल के अनुरूप है और इसे 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' कार्यक्रम का हिस्सा बताया गया है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें ईंधन के रूप में हाइड्रोजन के उपयोग से केवल भाप और पानी ही उत्सर्जित होता है, जिससे डीज़ल की तुलना में प्रदूषण नहीं के बराबर होता है। इस तरह यह ट्रेन स्वच्छ रेल परिवहन की दिशा में एक ठोस कदम है।

नमो ग्रीन रेल की शुरुआत को भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे देश स्वच्छ रेल तकनीक अपनाने वाले अग्रणी देशों की कतार में आ खड़ा हुआ है। स्वदेशी तकनीक से तैयार इस ट्रेन का सफल परिचालन आने वाले समय में इस तरह की और ट्रेनों के मार्ग प्रशस्त कर सकता है। हरित ऊर्जा से चलने वाली इस ट्रेन को भारतीय रेलवे के लिए भविष्य की एक झलक के रूप में देखा जा रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक परिवहन दोनों को साथ लेकर चलती है।

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