पेट्रोल और डीजल के दाम में 10 दिन के भीतर चौथी बार बढ़ोतरी की गई है। इस बार पेट्रोल के दाम 2 रुपये 61 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दाम 2 रुपये 71 पैसे प्रति लीटर बढ़ाए गए हैं। पिछले 10 दिनों में पेट्रोल कुल मिलाकर 7 रुपये से अधिक महंगा हो चुका है।
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी क्रूड ऑयल इंडियन बास्केट की कीमत पिछले कई दिनों से 107-108 डॉलर के आसपास है। हालांकि मध्यपूर्व में सीजफायर लागू है लेकिन स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज से कार्गो जहाजों की आवाजाही बाधित होने से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है।
तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक बोझ इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण बताया जा रहा है। 10-15 दिन पहले पेट्रोलियम मंत्री ने बताया था कि तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी 2 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच चुकी है और हर दिन उन्हें 1000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मध्यपूर्व की स्थिति में सुधार नहीं होता और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पूरी तरह से खुलकर नहीं आता, तब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी और इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डालना जारी रहेगा। हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान से उम्मीद जगी है कि बातचीत से समस्या का हल निकल सकता है।
लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों से आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित होंगी। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि जनता पहले से महंगाई से परेशान है और ईंधन की बढ़ती कीमतें उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही हैं।
