दुनिया भर में इस समय ऊर्जा संकट की आंच तेज है, लेकिन इसके बावजूद भारत की रसोई में चूल्हा अभी भी एक संतुलित कीमत पर जल रहा है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों पर नजर डालें तो भारत में यह कई दूसरे देशों की तुलना में काफी कम दाम पर उपलब्ध है, जबकि वैश्विक बाजार और पड़ोसी देशों के आंकड़े एक अलग ही कहानी बयां करते हैं।
सबसे पहले बात वैश्विक लागत की, जो मौजूदा हालात में काफी बढ़ चुकी है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच, एक सिलेंडर की आपूर्ति लागत अब बढ़कर 1600 रुपये से अधिक हो चुकी है। यानी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सिलेंडर तैयार होकर उपभोक्ता तक पहुंचने में आने वाली लागत में बड़ा उछाल देखने को मिला है।
इसके बरअक्स भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर बहुत कम दाम पर मिल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में उज्ज्वला योजना के तहत एक सिलेंडर 642 रुपये में उपलब्ध है। इतना ही नहीं, हर साल पहले चार रिफिल पर 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी भी दी जाती है, जिससे उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला असली बोझ और कम हो जाता है।
अब अगर भारत की तुलना उसके पड़ोसी देशों से की जाए तो अंतर साफ नजर आता है। आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में एक घरेलू सिलेंडर 1046 रुपये में मिल रहा है, जबकि श्रीलंका में यही सिलेंडर 1241 रुपये का पड़ रहा है। यानी दोनों ही पड़ोसी देशों में घरेलू रसोई गैस भारत के मुकाबले काफी महंगी है।
यह अंतर सिर्फ पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि दूर के विकसित देशों में भी कीमतें कहीं ज्यादा हैं। उदाहरण के तौर पर, अमेरिका में एक घरेलू सिलेंडर 1755 रुपये में मिल रहा है, जो भारत में मिलने वाले सिलेंडर के मुकाबले कहीं अधिक महंगा है। इस तरह विकसित बाजारों में भी उपभोक्ताओं को रसोई गैस के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
खास बात यह है कि भारत अपनी एलपीजी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरतों का करीब 60 प्रतिशत आयात करता है, और यह आपूर्ति मुख्य रूप से पश्चिम एशिया से ही आती है। इसी क्षेत्र में जारी संकट के बावजूद घरेलू स्तर पर सिलेंडर की कीमतों का अपेक्षाकृत कम बने रहना इन आंकड़ों की सबसे अहम बात है।
