भारत के औद्योगिक उत्पादन के मोर्चे पर सकारात्मक संकेत मिले हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी IIP में 5.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा देश के विनिर्माण और उत्पादन गतिविधियों में बनी मजबूती को दर्शाता है, जिसे अर्थव्यवस्था की समग्र सेहत के एक अहम पैमाने के रूप में देखा जा रहा है।
क्षेत्रवार आंकड़ों में जलापूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में और भी बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला, जहां 5.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। बुनियादी सेवाओं से जुड़े इस क्षेत्र में हुई वृद्धि इस बात का संकेत है कि शहरी और औद्योगिक ढांचे से जुड़ी गतिविधियों में भी गति बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार ये आंकड़े उस आशंका के विपरीत हैं, जिनमें वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर की बात कही जा रही थी। भारत उन चुनिंदा अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है जो न केवल इस वर्ष, बल्कि पिछले छह वर्षों से लगातार सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हैं।
इसी कड़ी में विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट भी भारत के लिए उत्साहजनक रही। रिपोर्ट में जहां कई देशों के विकास अनुमानों में कटौती की गई, वहीं भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाया गया। जानकारों का मानना है कि इसकी बड़ी वजह अर्थव्यवस्था के बुनियादी आधार यानी फंडामेंटल्स का मजबूत बने रहना है।
राजस्व के मोर्चे पर भी अच्छी खबर रही है। जीएसटी संग्रह में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिली है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 3 प्रतिशत से भी अधिक है। उल्लेखनीय यह है कि दरों में कटौती के बावजूद संग्रह में यह वृद्धि दर्ज की गई, जिसे कर अनुपालन और आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने का संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संकट के दौरान, जब यह मार्ग कभी खुलता और कभी बंद होता रहा, उस दौरान भी भारत ने अपने पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को संभाले रखा। देश में कहीं भी ईंधन की कतारें या किल्लत देखने को नहीं मिली, जो आपूर्ति प्रबंधन और आर्थिक स्थिरता को दर्शाता है।
