स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल आज एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, जिसे PMJAY के नाम से जाना जाता है, को राज्य में लागू करने की दिशा में आज एक अहम पहल हो रही है। इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं।
इस समझौते के साथ ही पश्चिम बंगाल इस केंद्रीय स्वास्थ्य योजना को अपनाने वाला देश का 36वां राज्य बन जाएगा। यह कदम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि अब तक पश्चिम बंगाल देश का अकेला ऐसा राज्य था, जहां यह योजना लागू नहीं की गई थी। अब इस फैसले के बाद राज्य भी इस राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य कवरेज के दायरे में शामिल हो जाएगा।
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा राज्य के आम परिवारों को मिलेगा। योजना के तहत पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मुहैया कराया जाता है। खास बात यह है कि यह इलाज पूरी तरह कैशलेस होता है, यानि मरीज को इलाज के बदले मौके पर पैसे चुकाने की जरूरत नहीं पड़ती और इलाज का खर्च योजना के तहत ही वहन किया जाता है।
इस कवरेज के दायरे में इलाज से जुड़ी कई जरूरी चीजें शामिल हैं। योजना के अंतर्गत अस्पताल में भर्ती होने, सर्जरी, दवाइयों और तरह तरह की जांच तक का खर्च शामिल किया गया है। इस तरह पात्र मरीजों को सेकेंडरी और टर्शियरी स्तर की इलाज सुविधाएं इस योजना के माध्यम से उपलब्ध हो सकेंगी।
योजना की एक और अहम सुविधा मरीज के अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी जारी रहती है। योजना के नियमों के अनुसार, मरीज के डिस्चार्ज होने के 15 दिन बाद तक का खर्च भी इसी कवरेज में शामिल माना जाता है। इससे इलाज के तुरंत बाद की देखभाल और जरूरी खर्चों को लेकर परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कुछ हद तक कम हो सकेगा।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल के इस फैसले से राज्य के लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। एक ओर जहां इलाज पर होने वाला भारी खर्च गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए हमेशा से एक बड़ी चिंता रहा है, वहीं अब इस योजना के लागू होने के बाद ऐसे परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है।
