सूत्रों के हवाले से खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने फ्रांस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन के इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर सकते हैं। फ्रांस ने प्रधानमंत्री मोदी को G7 में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है, जिससे इस बैठक की संभावना और प्रबल हो गई है। यदि यह मुलाकात होती है तो यह फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में हुई बैठक के बाद दोनों नेताओं का पहला आमना-सामना होगा। गौरतलब है कि इस बीच दोनों नेताओं ने जून 2025 में कनाडा में G7 और नवंबर 2025 में मलेशिया में APEC शिखर सम्मेलन के दौरान मिलने के अवसर गंवा दिए थे।
दोनों पक्ष एक व्यापक व्यापार समझौते पर चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक बताए जा रहे हैं। बातचीत के प्रमुख विषयों में प्रौद्योगिकी सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखलाओं का पुनर्गठन और शुल्क संबंधी मुद्दे शामिल हैं। यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान संकट और वैश्विक ऊर्जा चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इसी महीने नई दिल्ली का दौरा करने वाले हैं, जिसे इस संभावित मुलाकात की जमीन तैयार करने के रूप में भी देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी का जून से सितंबर 2026 तक का कूटनीतिक कार्यक्रम अत्यंत व्यस्त है। जून में फ्रांस में G7 के बाद, अगस्त में किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन होगा जहां रूस के राष्ट्रपति पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और संभवत: ईरान के राष्ट्रपति भी मौजूद रहेंगे। सितंबर 2026 में भारत BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जो मोदी की बहुपक्षीय कूटनीति का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। इसके अलावा अफ्रीकी देशों की मेजबानी भी योजना में शामिल है।
इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में अपने पांच देशों के दौरे को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस दौरे में नीदरलैंड्स के साथ 17 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए और संयुक्त अरब अमीरात से 5 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता हासिल की गई। विश्लेषकों का मानना है कि फ्रांस में G7 के मौके पर यदि मोदी-ट्रंप मुलाकात होती है, तो यह भारत-अमेरिका संबंधों को एक नई दिशा दे सकती है, खासकर ऐसे दौर में जब दोनों देश शुल्क विवादों और प्रौद्योगिकी साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर सहमति तलाश रहे हैं।
