2008 के मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के बेटे तलहा सईद को पाकिस्तान के फैसलाबाद शहर में आयोजित "स्टेबिलिटी ऑफ पाकिस्तान कॉन्फ्रेंस" में खुलेआम मंच पर बिठाया गया और उनका भव्य स्वागत किया गया। News18 India की रिपोर्ट के अनुसार, तलहा सईद को पगड़ी पहनाई गई, मंच पर ऊंची कुर्सी दी गई और वीआईपी बरताव किया गया। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राना सनाउल्लाह खान ने तलहा सईद से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की, उनसे हाथ मिलाया और गर्मजोशी से बातचीत की। यह सब खुलेआम हुआ, बिना किसी छुपाव के, जो पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान और आतंकवादी संगठनों के बीच गहरे संबंधों की ओर इशारा करता है।
तलहा सईद ने इस कॉन्फ्रेंस के मंच से उत्तेजक और कट्टरपंथी भाषण दिए, और उसी मंच से राना सनाउल्लाह खान ने भी संबोधन किया। एक अलग कार्यक्रम में, जो एक अंतिम संस्कार समारोह था, पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने भी तलहा सईद से मुलाकात की। इसके अलावा, पाकिस्तान के योजना एवं विकास मंत्री एहसान इकबाल भी इस अवसर पर उपस्थित थे और उन्होंने भी तलहा सईद से मिलकर बातचीत की। यह स्थिति और भी चिंताजनक इसलिए है क्योंकि ये सभी पाकिस्तान की मौजूदा सरकार के वरिष्ठ मंत्री और सलाहकार हैं, जो एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांछित आतंकवादी के परिवार से सार्वजनिक रूप से मिल रहे हैं।
खुफिया सूत्रों के अनुसार, तलहा सईद लश्कर-ए-तैयबा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उसकी जिम्मेदारियों में अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क का निर्माण, नए लड़ाकों की भर्ती और आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाना शामिल है। यह तथ्य कि ऐसे व्यक्ति को पाकिस्तान की सरकारी कॉन्फ्रेंस में न केवल आमंत्रित किया गया बल्कि सम्मानित भी किया गया, इस बात को साबित करता है कि पाकिस्तान की सरकार और आतंकवादी संगठनों के बीच की दूरी व्यावहारिक रूप से शून्य है। खुफिया एजेंसियों का दावा है कि पाकिस्तान सक्रिय रूप से भारत के खिलाफ हमले करने के लिए आतंकवादियों को पोषित कर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञ इस बात के ठोस प्रमाण के रूप में देख रहे हैं कि पाकिस्तान और आतंकवाद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। 2008 में मुंबई पर हुए भीषण आतंकी हमले, जिसमें 166 लोगों की जान गई थी, उसके मास्टरमाइंड हाफिज सईद को पाकिस्तान ने कभी भारत को सौंपने से इनकार किया। अब उनके बेटे को सरकारी मंचों पर सम्मान देना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। यह घटना भारत की उन चिंताओं को और मजबूत करती है कि पाकिस्तान की गहरी सरकारी संरचना आतंकवादी संगठनों को रणनीतिक संपत्ति के रूप में इस्तेमाल करना जारी रखे हुए है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मामले में पाकिस्तान पर और अधिक दबाव बनाने की जरूरत है।
