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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश किया। इस कानून के बनते ही बहुविवाह पर 7 साल की जेल, शादी छिपाकर दूसरी शादी पर 10 साल जेल, और लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल होगी। आदिवासियों को इससे बाहर रखा गया है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधानसभा के पहले सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश कर दिया है। चुनाव से पहले सरमा ने वादा किया था कि दोबारा सीएम बनने पर विधानसभा के पहले सत्र में ही राज्य में UCC कानून लागू करेंगे। तीन दिन के भीतर इस बिल को पास किया जा सकता है।
इस कानून के प्रमुख प्रावधानों में शामिल है कि पहली शादी रहते हुए दूसरी शादी करने पर 7 साल की जेल होगी। यदि कोई पहली शादी छिपाकर दूसरी शादी करता है तो 10 साल तक जेल संभव है। सभी धर्मों में शादी के लिए एक न्यूनतम उम्र का कानून लागू होगा जिसमें लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल हो सकती है।
शादियों और तलाक का पूरा रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में दर्ज होगा। पिता की संपत्ति पर बेटे और बेटी दोनों को समान अधिकार मिलेगा। लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों के लिए नियमों के साथ रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि असम सरकार ने आदिवासियों को UCC के नियमों से बाहर रखा है। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि UCC की कोई पाबंदी वनवासी जगत पर लगने वाली नहीं है। गुजरात और उत्तराखंड के बाद असम तीसरा राज्य है जहां भाजपा सरकार ने UCC लागू किया है।
विपक्ष ने इस बिल पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि अगर सबके लिए समान कानून है तो आदिवासियों को बाहर क्यों रखा गया, और यह संविधान के अनुच्छेद 25 में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। सदन में इसको लेकर जोरदार बहस की उम्मीद है।