अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद में अब एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। इस मामले में एफआईआर दर्ज होने और आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल और फेसबुक पेज पर प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इन दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफे प्राप्त होने की पुष्टि की है।
इस तरह यह विवाद अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कानूनी कार्रवाई और ट्रस्ट के भीतर बड़े बदलाव तक पहुंच गया है। एफआईआर दर्ज होने और गिरफ्तारियों के बाद ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों का पद छोड़ना इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है और इससे जुड़े सवाल और गहरे हो गए हैं।
इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे विवाद पर जांच की स्थिति स्पष्ट की थी। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखते हुए रामभक्तों की भावनाओं का सम्मान करने की अपील की थी और आरोपों को लेकर विपक्ष पर पलटवार भी किया था।
मुख्यमंत्री ने बताया था कि राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है। उनके अनुसार यह कदम मंदिर से जुड़े ट्रस्ट के अनुरोध पर उठाया गया, ताकि मामले की निष्पक्ष पड़ताल हो सके। उन्होंने अयोध्या को लेकर समाचार पत्रों में आई खबरों का भी उल्लेख किया था।
अपने बयान में योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि अयोध्या के बारे में जो बातें समाचार पत्रों में सुनने को मिलीं, उन्हीं के मद्देनजर ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी जांच बैठाई गई है। उन्होंने भरोसा जताया था कि यह जांच दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी और इसमें किसी तरह का कोई संशय नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री के अनुसार सच्चाई सामने लाने के लिए ही यह जांच कराई जा रही है।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडे का एक दावा रहा है, जो उन्होंने 7 जून को किया था। उनके इसी दावे के बाद राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर सवाल खड़े हुए और मामला राजनीतिक रूप से गरमा गया। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी के आरोपों पर सीधे तौर पर जवाब दिया था।
वहीं दूसरी ओर इस मामले में ट्रस्ट की तरफ से चंपत राय ने सफाई दी थी कि उस समय तक ऐसी कोई भी बात सामने नहीं आई है। यानी एक तरफ विपक्ष की ओर से दावा किया गया, तो दूसरी तरफ ट्रस्ट से जुड़े पक्ष ने ऐसे किसी मामले के तब तक सामने न आने की बात कही थी। इन्हीं परस्पर विरोधी बातों के बीच अब जांच और कार्रवाई ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।
अयोध्या में मुख्यमंत्री ने रामभक्तों को संबोधित करते हुए कहा था कि राम मंदिर के लिए जब आपने 500 साल इंतजार किया है, तो थोड़ा और यानी 15 दिन का इंतजार और कीजिए। उन्होंने स्पष्ट किया था कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे सजा मिलकर रहेगी। अब एफआईआर, गिरफ्तारियों और ट्रस्ट के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे के साथ यह मामला एक नए और अहम पड़ाव पर पहुंच गया है।
