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सीबीएसई परीक्षा मूल्यांकन अनुबंध में गुणवत्ता नियंत्रण खंड हटाए गए, टेंडर प्रक्रिया पर सवाल

सीबीएसई परीक्षा मूल्यांकन अनुबंध में गुणवत्ता नियंत्रण खंड हटाए गए, टेंडर प्रक्रिया पर सवाल | AVALW News

सीबीएसई की परीक्षा कॉपी मूल्यांकन के लिए दिए गए अनुबंध में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। पिछले टेंडर में मौजूद गुणवत्ता नियंत्रण और ब्लैकलिस्ट संबंधी अनिवार्य खंड नए टेंडर से पूरी तरह हटा दिए गए थे, जिससे कम बोली लगाने वाली कंपनी को अनुबंध मिला। टीसीएस ने प्रति कॉपी पैंसठ रुपये का कोटेशन दिया था जबकि चयनित कंपनी ने केवल चौबीस रुपये पचहत्तर पैसे की बोली लगाई।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई की परीक्षा कॉपियों के मूल्यांकन के लिए दिए गए अनुबंध में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है, जिससे देश भर के करोड़ों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में पता चला है कि नए टेंडर से गुणवत्ता नियंत्रण के अनिवार्य खंड पूरी तरह हटा दिए गए थे, जो पहले के टेंडर में मौजूद थे।

सूत्रों के अनुसार टेंडर के पहले दो राउंड विफल रहे थे। पहले राउंड में केवल टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस क्वालिफाई हुई थी, लेकिन एकल बोली होने के कारण उसे रद करना पड़ा। तीसरे राउंड में टीसीएस ने एक कॉपी की जांच के लिए पैंसठ रुपये का कोटेशन दिया, जबकि चयनित कंपनी ने कर सहित केवल चौबीस रुपये पचहत्तर पैसे की बोली लगाई।

सबसे गंभीर बात यह है कि पहले टेंडर में तीन महत्वपूर्ण खंड शामिल थे, जिनमें रिकॉर्ड पर खराब प्रदर्शन वाली कंपनियों को अयोग्य घोषित करने का प्रावधान था। नए टेंडर में ये सभी खंड पूरी तरह हटा दिए गए, जिससे ऐसी कंपनियों के लिए भी अनुबंध प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हो गया जो पहले अयोग्य मानी जाती।

इसके अलावा पहले टेंडर में एक खंड यह भी था कि यदि कोई कंपनी पहले से ब्लैकलिस्टेड है तो वह अनुबंध के लिए अयोग्य होगी। नए टेंडर से यह खंड भी हटा दिया गया। इन परिवर्तनों ने टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेष रूप से चिंताजनक बात यह है कि यह अनुबंध परीक्षा शुरू होने से मात्र छियासठ दिन पहले दिया गया था। पांच दिसंबर दो हजार पचीस को अनुबंध दिया गया और नौ फरवरी को इसे आनन-फानन में पूरे देश में लागू कर दिया गया। इतने कम समय में राष्ट्रव्यापी तैनाती करने से गुणवत्ता सुनिश्चित करना लगभग असंभव माना जा रहा है।

इस विवाद के बीच सीबीएसई के कम्पार्टमेंट परीक्षा परिणामों में भी चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। देश भर में कुल तिरसठ हजार आठ सौ कम्पार्टमेंट में से भौतिकी विषय में अट्ठावन प्रतिशत छात्र अनुत्तीर्ण हो गए, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया की गुणवत्ता पर और अधिक सवाल उठने लगे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने महत्वपूर्ण अनुबंध में गुणवत्ता नियंत्रण के खंड हटाना अत्यंत गंभीर मामला है। विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की है, जबकि सरकार की ओर से अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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