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GST अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील की समयसीमा 31 जुलाई तक बढ़ी

GST अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील की समयसीमा 31 जुलाई तक बढ़ी

सरकार ने माल एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) में अपील दाखिल करने की अंतिम तिथि एक महीने बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी है। पिछले 15 दिनों में ही 30,000 से अधिक अपीलें दाखिल की गईं, जिससे करदाताओं के विवादों के समाधान की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

सरकार ने माल एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण यानी GSTAT में अपील दाखिल करने की अंतिम तिथि को एक महीने के लिए आगे बढ़ा दिया है। पहले यह समयसीमा मंगलवार को समाप्त हो रही थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दिया गया है। इस फैसले से उन करदाताओं को राहत मिलेगी जो अपने लंबित मामलों को लेकर न्यायाधिकरण का रुख करना चाहते हैं।

समयसीमा बढ़ाए जाने के पीछे अपीलों की भारी संख्या एक बड़ी वजह मानी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार पिछले महज 15 दिनों में ही करीब 30,000 अपीलें दाखिल की गई हैं, जबकि एक ही दिन में सर्वाधिक 5,500 अपीलें दर्ज की गईं। इस रफ्तार ने यह स्पष्ट कर दिया कि बड़ी संख्या में करदाता न्यायाधिकरण के जरिए अपने विवादों का समाधान चाहते हैं।

GST अपीलीय न्यायाधिकरण को माल एवं सेवा कर से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए एक अहम मंच के तौर पर देखा जा रहा है। समयसीमा में दी गई इस रियायत से करदाताओं को अपनी अपील तैयार करने और जरूरी दस्तावेज जुटाने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा, जिससे जल्दबाजी में होने वाली खामियों से भी बचा जा सकेगा।

न्यायाधिकरण को मजबूती देने की दिशा में पहले ही कदम उठाए जा चुके हैं। सरकार ने मई 2024 में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा को GSTAT की प्रधान पीठ का अध्यक्ष नियुक्त किया था, ताकि न्यायाधिकरण के कामकाज को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया जा सके और मामलों की सुनवाई का ढांचा तैयार हो सके।

उल्लेखनीय है कि देश में माल एवं सेवा कर यानी GST 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था। तब से अब तक करदाताओं और कर विभाग के बीच कई तरह के विवाद सामने आते रहे हैं, जिनके समाधान के लिए एक समर्पित अपीलीय व्यवस्था की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही थी।

अपीलीय न्यायाधिकरण के सक्रिय होने और समयसीमा बढ़ाए जाने के बाद उम्मीद की जा रही है कि करदाताओं के विवादों के निपटारे की प्रक्रिया अब अधिक तेज और सुव्यवस्थित हो सकेगी। इससे न केवल लंबित मामलों का बोझ कम होगा, बल्कि कर प्रणाली में पारदर्शिता और भरोसे को भी बल मिलेगा।

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