प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर भारतीय नौसेना में नए स्वदेशी पोत शामिल किए। इनमें सर्वेक्षण पोत आईएनएस संशोधक और पनडुब्बी रोधी युद्धपोत आईएनएस अग्रय शामिल रहे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने समुद्री सुरक्षा को देश के लिए बेहद अहम बताते हुए नौसेना की बढ़ती ताकत पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्र के आर्थिक और सामरिक महत्व को देखते हुए इसकी सुरक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समुद्री ताकत के बिना कोई भी राष्ट्र बड़ी शक्ति नहीं बन सकता, और इसी सोच के साथ भारत अपनी नौसैनिक क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है।
मोदी ने बताया कि बीते वर्षों में चालीस से अधिक मेड इन इंडिया युद्धपोत और पनडुब्बियां नौसेना में शामिल हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि लगभग हर कुछ सप्ताह में भारतीय नौसेना को एक नई ताकत मिल रही है, जो देश में स्वदेशी जहाज निर्माण की तेज रफ्तार को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक बड़े विजन के साथ ब्लू इकॉनमी और समुद्री क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने जहाज निर्माण के क्षेत्र में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया और इसे देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम बताया।
मोदी के अनुसार, नीतिगत सुधारों के परिणामस्वरूप भारत अब केवल रक्षा सामग्री खरीदने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि एक निर्माता और निर्यातक भी बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव देश की आत्मनिर्भरता की नीति का सीधा परिणाम है।
प्रधानमंत्री ने रक्षा निर्यात के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ साल पहले तक भारत करीब 700 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादों का निर्यात करता था, जबकि अब यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने इसे पिछले बारह वर्षों में मिलकर किए गए काम का परिणाम बताया।
