देश में ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आज से प्रभावी हो रहा है। एक नई योजना लागू की जा रही है, जो मौजूदा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा की जगह ले रही है। इस बदलाव को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम बताया जा रहा है।
नई योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को अब पहले से अधिक दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। जहां पहले यह गारंटी 100 दिन की थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इसका सीधा अर्थ है कि पात्र परिवारों को साल में अधिक दिनों तक काम पाने का कानूनी अधिकार मिलेगा।
सरकार ने इस योजना के लिए बड़ा वित्तीय प्रावधान किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके लिए 95,692 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजटीय आवंटन किया गया है, जो योजना के दायरे और उस पर सरकार के जोर को दर्शाता है।
योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में आजीविका के साधन उपलब्ध कराना और लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर देना है। रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी से उम्मीद की जा रही है कि ग्रामीण परिवारों की आय और आर्थिक स्थिरता को सहारा मिलेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में इस तरह की योजनाओं को अहम माना जाता है, क्योंकि इनसे न केवल रोजगार मिलता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचे और परिसंपत्तियों का निर्माण भी होता है। बढ़े हुए बजट और दिनों के साथ इसका दायरा और बढ़ने की संभावना है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नई योजना जमीनी स्तर पर किस तरह लागू होती है और मनरेगा के मुकाबले इसमें क्या व्यावहारिक बदलाव देखने को मिलते हैं। इसके क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक पहुंच से ही इसकी वास्तविक सफलता का अंदाजा लगाया जा सकेगा।
