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पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सरकार बनने के बाद तृणमूल कांग्रेस में टूट का सिलसिला जारी है। 36 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है और नगरपालिकाओं में 100 से अधिक पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम के पद छोड़ने की भी संभावना जताई जा रही है।
पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सरकार बनने के बाद तृणमूल कांग्रेस में टूट का सिलसिला लगातार जारी है। पार्टी के 36 विधायकों ने तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी है, जो पार्टी के लिए एक गंभीर झटका है। इसके अलावा नगरपालिकाओं में 100 से अधिक पार्षदों ने भी इस्तीफा दे दिया है, जिससे स्थानीय स्तर पर भी पार्टी की पकड़ कमजोर हो रही है।
कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम के भी अपने पद से इस्तीफा देने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो यह तृणमूल कांग्रेस के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका होगा। बीजेपी नेताओं का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस के बहुत सारे सांसद और विधायक उनके संपर्क में हैं और जल्द ही बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।
बीजेपी नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस की तुलना ताश के पत्तों के महल से की है, जिसका कहना है कि पार्टी पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। एक बीजेपी नेता ने कहा कि भय से पार्टी नहीं चलती, भरोसे से पार्टी चलती है। फुलता विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस चौथे स्थान पर रही और उनकी जमानत भी नहीं बच सकी, जो पार्टी की गिरती लोकप्रियता का स्पष्ट संकेत है।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने 2011 से पश्चिम बंगाल में सत्ता संभाली थी और 15 वर्षों तक राज्य पर शासन किया। हालांकि हाल के विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जीत के बाद राज्य की राजनीति में भारी उथल-पुथल मच गई है। पार्टी में बड़े पैमाने पर दल-बदल ने ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस में यह टूट कई कारणों से हो रही है। एक तरफ बीजेपी सत्ता में आने के बाद प्रशासनिक दबाव बढ़ा है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर असंतोष लंबे समय से पनप रहा था। कई नेता पार्टी नेतृत्व के निर्णयों से खुश नहीं थे और सत्ता परिवर्तन ने उन्हें पार्टी छोड़ने का अवसर प्रदान किया।