पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में बड़ी टूट हुई है और शुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद पहले ही दिन से ममता के नेताओं पर कार्रवाई हो रही है। लोगों में गुस्सा है और तृणमूल के नेताओं को चोर कहकर याद दिला रहे हैं।
अट्ठावन विधायकों ने हस्ताक्षर करके विधानसभा के स्पीकर को पत्र सौंप दिया है और उन्हें विपक्ष के नेता का दर्जा दे दिया गया है। ये विधायक तृणमूल कांग्रेस छोड़कर रितो प्रतो बनर्जी के साथ बनाई जा रही असली तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने को तैयार हैं।
अब बात सांसदों की हो रही है। बीस से अधिक लोकसभा और राज्यसभा के सांसद बीजेपी में शामिल होने के लिए संपर्क में हैं। तृणमूल कांग्रेस के पास जो बयालीस सीटें हैं, उनमें से आधे से अधिक सांसद पार्टी छोड़ने की तैयारी में बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार इन सांसदों की कोई शर्त नहीं है और वे बिना किसी पूर्व शर्त के बीजेपी में शामिल होना चाहते हैं। कोलकाता, दक्षिण चौबीस परगना, उत्तर चौबीस परगना, नदिया, बीरभूम और उत्तर बंगाल से सांसद शामिल होने को तैयार बताए जा रहे हैं।
काकोली घोष दस्तिदार का नाम सबसे पहले लिया जा रहा है। उत्तर चौबीस परगना में उनके खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए कार्रवाई की घोषणा हो चुकी है। इसके अलावा मालदा, मुर्शिदाबाद और पुरुलिया से भी सांसद बीजेपी के संपर्क में बताए जा रहे हैं।
बीजेपी के एक बड़े नेता ने बताया कि दो तीन सांसदों को छोड़कर बाकी सभी बीजेपी के संपर्क में हैं, लेकिन पार्टी चार पांच अच्छे लोगों पर ही विचार करेगी। बीजेपी का इरादा सभी को शामिल करने का नहीं बल्कि चुनिंदा नेताओं को लेने का है।
पश्चिम बंगाल में यह राजनीतिक उलटफेर तब आया है जब शुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराकर सत्ता संभाली है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस और कमजोर होगी क्योंकि नेता अपनी दशा और दिशा बदलने की तैयारी कर रहे हैं।
