खाड़ी देशों ने अमेरिका को बड़ा झटका दिया है। सऊदी अरब ने सिर्फ मार्च महीने में अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड से 10.8 अरब डॉलर निकाल लिए, जिसके बाद अमेरिकी कोष में सऊदी अरब की शेष होल्डिंग घटकर मात्र 14.6 अरब डॉलर रह गई है। इसके साथ ही संयुक्त अरब अमीरात ने भी 5.8 अरब डॉलर की निकासी की है, हालांकि UAE की अमेरिकी ट्रेजरी में अभी भी 114.1 अरब डॉलर की होल्डिंग बची है। कुल मिलाकर दोनों खाड़ी देशों ने अमेरिकी ट्रेजरी से करीब 15 अरब डॉलर की रकम निकाली है, जो अमेरिका के लिए एक बड़ा आर्थिक और राजनीतिक संकेत है।
इस वित्तीय कदम के साथ ही सऊदी अरब और UAE दोनों ने साफ तौर पर घोषणा कर दी है कि वे ईरान पर किसी भी अमेरिकी सैन्य हमले में सहयोग नहीं देंगे। यह 24 घंटे का अल्टीमेटम अमेरिका के लिए एक बड़ा सदमा है, क्योंकि ये दोनों देश पारंपरिक रूप से अमेरिका के सबसे करीबी खाड़ी सहयोगी रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर हमले को लेकर जो हिचकिचाहट दिखा रहा है, उसका एक बड़ा कारण खाड़ी सहयोगियों का यह रुख भी है। बिना सऊदी अरब और UAE के सहयोग के, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियान चलाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
दूसरी तरफ रूस और चीन ने ईरान की रक्षा क्षमता को काफी मजबूत कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार रूस ने ईरान को अमेरिकी सेना से जुड़ी गोपनीय खुफिया जानकारी दी है, जिसमें अमेरिकी लड़ाकू विमानों और बमवर्षकों की उड़ान के पैटर्न, पायलटों की जानकारी, ईंधन भरने का समय और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के तरीके शामिल हैं। वहीं चीन ने ईरान की वायु रक्षा प्रणालियों को अपग्रेड किया है, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि ये अमेरिकी मिसाइलों को रोकने में 100 प्रतिशत तक सफल हो सकती हैं। इन घटनाक्रमों ने अमेरिका की हवाई ताकत की प्रभावशीलता को लगभग आधा कर दिया है।
इस बीच इज़राइल अपनी सैन्य तैयारियां लगातार बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू युद्ध कमांडरों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। इज़राइल का अगला लक्ष्य तेहरान में शासन परिवर्तन बताया जा रहा है और उसने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ईरान के परमाणु हथियारों का पूरी तरह सफाया नहीं हो जाता, तब तक वह रुकने को तैयार नहीं है। बेन गुरियन हवाई अड्डे को संभावित हमलों के लिए युद्ध मुख्यालय के रूप में तैयार किया जा रहा है। ये सभी घटनाक्रम मिलकर मध्य पूर्व में एक बेहद जटिल और खतरनाक स्थिति पैदा कर रहे हैं, जहां अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी ही उसके खिलाफ खड़े हो रहे हैं।
This article was produced by AVALW News on Wednesday, May 21, 2026 based on reporting from 1 verified news source. Our editorial process cross-references facts from multiple independent outlets to deliver accurate, comprehensive coverage. All original sources are linked below.
