सीबीएसई ने इस बार बारहवीं कक्षा के लिए पहली बार नई ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम प्रणाली लागू की है लेकिन यह डिजिटल मार्किंग सिस्टम आते ही विवादों में घिर गया है। छात्रों और अभिभावकों की ओर से गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
छात्रों का आरोप है कि कॉपियों को ठीक से स्कैन नहीं किया गया। कई उत्तर पुस्तिकाएं धुंधली थीं जिसके कारण परीक्षकों को उत्तर पढ़ने में दिक्कत हुई और छात्रों को उनकी वास्तविक क्षमता से कम नंबर मिले।
दिल्ली के छात्र वेदान श्रीवास्तव ने तो यह चौंकाने वाला दावा किया कि रिवैल्यूएशन के लिए पोर्टल से डाउनलोड की गई फिजिक्स की कॉपी उनकी थी ही नहीं। यह आरोप सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
फिजिक्स और मैथमेटिक्स जैसे विषयों में आंशिक रूप से सही उत्तरों पर दिए जाने वाले स्टेप मार्क्स इस बार कम्प्यूटर स्क्रीन पर कॉपियां जांचते वक्त ठीक से नहीं दिए गए। इससे छात्रों के स्कोर गिर गए जो उनके प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश को प्रभावित कर सकता है।
एक उन्नीस वर्षीय एथिकल हैकर ने दावा किया कि सीबीएसई के ओएसएम पोर्टल में कई खामियां हैं जिससे डेटा लीक का गंभीर खतरा है। सत्रह वर्षीय सार्थक सिद्धांत ने भी आरोप लगाया कि हैदराबाद की कंपनी कोएंट एजुकेट को लगातार यह ठेका दिया जाता रहा है।
सवाल यह उठ रहा है कि इस कंपनी को बार बार ठेका क्यों दिया गया और क्या उचित तकनीकी मूल्यांकन के बिना यह निर्णय लिया गया। कंपनी की तकनीकी क्षमता और डेटा सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
लाखों छात्रों का भविष्य इस मार्किंग प्रणाली की सटीकता पर निर्भर है। सीबीएसई को इन गंभीर आरोपों की तत्काल जांच करने और पारदर्शी तरीके से स्थिति स्पष्ट करने की आवश्यकता है ताकि छात्रों का विश्वास बहाल हो सके।
