अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ निषेध एवं तस्करी रोकथाम दिवस के अवसर पर भारत ने नशे के खिलाफ अपनी मुहिम को नई धार देते हुए एक बड़ा कदम उठाया। देश के अलग-अलग हिस्सों में जब्त किए गए लगभग 29,500 किलोग्राम ड्रग्स को नष्ट किया गया, जिसे सरकार ने ड्रग तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा प्रहार बताया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नष्ट किए गए इन मादक पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 6,000 करोड़ रुपये है। इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स का एक साथ विनाश इस बात का संकेत है कि तस्करी के नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए एजेंसियां किस पैमाने पर काम कर रही हैं और जब्ती लगातार बढ़ रही है।
इसी सिलसिले में नई दिल्ली में नार्को समन्वय केंद्र (नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर) की दसवीं बैठक आयोजित की गई। केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में नशे के विरुद्ध लड़ाई को और मजबूत करने तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाने के तौर-तरीकों पर गहन मंथन हुआ।
बैठक में नार्कोटिक्स के खिलाफ लड़ाई का एक स्पष्ट रोड मैप तैयार किया गया। इसके तहत अगले तीन साल के लिए एक विजन डॉक्युमेंट भी बनाया गया है, जिसमें नशे के विरुद्ध समन्वित जंग का खाका प्रस्तुत किया गया है, ताकि केंद्र और राज्यों की एजेंसियां एक साझा रणनीति के तहत आगे बढ़ सकें।
सरकार का जोर अब सिर्फ पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रहेगा। विजन डॉक्युमेंट में साफ किया गया है कि सिंथेटिक ड्रग्स और डार्क नेट के जरिए होने वाली आधुनिक तस्करी पर कड़ा प्रहार किया जाएगा, क्योंकि बदलते दौर में तस्कर तकनीक और ऑनलाइन माध्यमों का सहारा लेकर अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं।
सिंथेटिक ड्रग्स और डार्क नेट को निशाने पर लेने का फैसला इसलिए अहम है क्योंकि ये नए किस्म के नशीले पदार्थ और गुमनाम ऑनलाइन बाजार पारंपरिक निगरानी तंत्र के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। इन पर लगाम कसने के लिए तकनीकी निगरानी, अंतर-एजेंसी सहयोग और जांच एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
गृह मंत्रालय इस पूरी रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है। मादक पदार्थ निरोधक दिवस पर इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स का विनाश और तीन साल के विजन डॉक्युमेंट की तैयारी, दोनों मिलकर यह संदेश देते हैं कि सरकार नशे के खिलाफ अभियान को एक सतत और संगठित मुहिम के रूप में आगे ले जाना चाहती है।
