ब्रिटेन का प्रमुख बैंक स्टैंडर्ड चार्टर्ड अगले चार साल में दुनियाभर में 7,000 से अधिक नौकरियां खत्म करने की योजना बना रहा है। बैंक के मुताबिक यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन तकनीक को अपनाने के कारण उठाया जा रहा है। बैंक का कहना है कि इस बदलाव से उसका कामकाज बेहतर और सस्ता होगा, जिससे ग्राहकों को तेज और अधिक कुशल सेवाएं मिल सकेंगी। यह फैसला बैंकिंग उद्योग में बढ़ते डिजिटल बदलाव का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
भारत में स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की बड़ी मौजूदगी है और यहां बैंक के हजारों कर्मचारी काम करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का भारत पर गहरा असर पड़ सकता है, क्योंकि बैंक के कई बैक-ऑफिस और टेक्नोलॉजी ऑपरेशन भारत से संचालित होते हैं। AI के बढ़ते इस्तेमाल से डेटा प्रोसेसिंग, कस्टमर सर्विस और लोन प्रोसेसिंग जैसे कामों में मानव कर्मचारियों की जरूरत कम हो रही है। भारतीय बैंकिंग कर्मचारियों के लिए यह चिंता का विषय बन गया है कि क्या उनकी नौकरियां भी खतरे में हैं।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड का यह कदम किसी अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक रुझान का हिस्सा है जिसमें दुनियाभर के बड़े बैंक अपने कर्मचारियों की जगह AI और मशीन लर्निंग सिस्टम को ला रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में HSBC, ड्यूश बैंक और सिटीग्रुप जैसे बैंकों ने भी ऑटोमेशन के नाम पर बड़े पैमाने पर छंटनी की है। बैंकिंग क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि AI न केवल सामान्य बैंकिंग कार्यों को बल्कि जोखिम आकलन, ऑडिट और रेगुलेटरी कंप्लायंस जैसे जटिल कामों को भी अपने हाथ में ले रहा है।
इस घोषणा ने वित्तीय क्षेत्र में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। जहां बैंक इसे लागत कम करने और दक्षता बढ़ाने का जरिया बता रहे हैं, वहीं श्रमिक संगठनों और कर्मचारी यूनियनों ने इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि तकनीक के नाम पर लोगों की आजीविका छीनना उचित नहीं है और सरकारों को ऐसे बड़े पैमाने की छंटनी के खिलाफ नीतिगत सुरक्षा उपाय करने चाहिए। आने वाले समय में यह देखना होगा कि AI के बढ़ते दखल से बैंकिंग क्षेत्र में रोजगार की तस्वीर कैसे बदलती है।
