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सीबीएसई का री-इवैल्यूएशन पोर्टल बार-बार क्रैश, कैप्चा फेल और क्रेडेंशियल एरर से छात्र परेशान

सीबीएसई का री-इवैल्यूएशन पोर्टल बार-बार क्रैश, कैप्चा फेल और क्रेडेंशियल एरर से छात्र परेशान | AVALW News

सीबीएसई का री-इवैल्यूएशन पोर्टल शुरू होने के कुछ ही देर बाद तकनीकी गड़बड़ियों की चपेट में आ गया। बारहवीं के लाखों छात्र जो अपनी आंसर शीट की दोबारा जांच करवाना चाहते हैं, उन्हें बार-बार कैप्चा एक्सपायर, इनवैलिड क्रेडेंशियल्स और साइट न खुलने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। एनडीटीवी की जांच में भी पोर्टल में गड़बड़ी की पुष्टि हुई।

सीबीएसई का बहुप्रतीक्षित री-इवैल्यूएशन पोर्टल दो जून को सुबह चार बजकर बारह मिनट पर शुरू होने के कुछ ही देर बाद गंभीर तकनीकी गड़बड़ियों की चपेट में आ गया। बोर्ड ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया था कि पोर्टल तैयार है और इसके साथ री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया समझाने वाला एक वीडियो भी शेयर किया था, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर स्थिति बिल्कुल अलग निकली।

बारहवीं कक्षा के लाखों छात्र जो तेरह मई को घोषित बोर्ड परीक्षा परिणामों से असंतुष्ट हैं और अपनी आंसर शीट की दोबारा जांच करवाना चाहते हैं, उन्हें बार-बार कैप्चा एक्सपायर होने, इनवैलिड क्रेडेंशियल्स का संदेश आने और साइट के पूरी तरह न खुलने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी परेशानी साझा की।

एनडीटीवी ने खुद जाकर छात्रों के साथ रियलिटी चेक किया। जब एक छात्रा ने अपनी सारी जानकारी भरकर साइन इन करने का प्रयास किया तो स्क्रीन पर कैप्चा एक्सपायर्ड का संदेश आ गया। यह समस्या एक-दो बार नहीं बल्कि कई बार दोहराई गई। कभी कैप्चा फेल बताता है तो कभी इनवैलिड क्रेडेंशियल्स का संदेश स्क्रीन पर आता है।

इससे पहले भी इस पोर्टल को लेकर गंभीर शिकायतें आ चुकी हैं। एक छात्र ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया था कि जब उसने री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया तो उसे जो आंसर शीट दिखाई गई वह किसी और बच्चे की थी। इस खुलासे के बाद री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

सरकार ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए एक इनक्वायरी कमीशन बैठाने का बड़ा फैसला लिया है जो ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रक्रिया की जांच करेगा। यह आयोग देखेगा कि सीबीएसई ने जिस तरह से टेंडर निकाला, कंपनी का चयन किया और पूरे देश में इस प्रणाली को लागू किया, उसमें कहां गड़बड़ियां हुईं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीएसई जैसे महत्वपूर्ण बोर्ड का पोर्टल इतनी गंभीर तकनीकी समस्याओं से जूझना स्वीकार्य नहीं है। एक ऐसा पोर्टल जो एक समय में केवल आठ हजार बच्चों का लोड संभालने के लिए तैयार हो, जबकि लाखों छात्र एक साथ री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करना चाहते हैं, यह बोर्ड की तकनीकी तैयारी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

छात्रों और अभिभावकों में इस स्थिति को लेकर गहरा आक्रोश है। करोड़ों बच्चों के भविष्य से जुड़ा यह पोर्टल जब ठीक से काम नहीं कर रहा तो उनकी चिंता स्वाभाविक है। शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई से तत्काल इस समस्या को दूर करने और पोर्टल की क्षमता बढ़ाने की मांग तेज हो रही है।

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