LIVE consensus avg84%
UTC--:--:-- edition--.--.--

तृणमूल कांग्रेस की बैठक में वरिष्ठ विधायकों ने खुलकर उठाए सवाल, पार्टी में बढ़ी अंतर्कलह

तृणमूल कांग्रेस की बैठक में वरिष्ठ विधायकों ने खुलकर उठाए सवाल, पार्टी में बढ़ी अंतर्कलह

टीएमसी की विधायक बैठक में 80 में से सिर्फ 67 विधायक पहुंचे। तीन वरिष्ठ विधायकों ने अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में भवानीपुर की हार पर सवाल उठाए।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने पार्टी के सभी विधायकों की एक बैठक बुलाई, लेकिन इस बैठक में पार्टी की आंतरिक दरारें खुलकर सामने आ गईं। कुल 80 विधायकों में से केवल 67 ही बैठक में उपस्थित हुए, जबकि छह विधायकों ने अपनी अनुपस्थिति का कोई कारण तक नहीं बताया। यह अनुपस्थिति अपने आप में पार्टी नेतृत्व के प्रति बढ़ते असंतोष का संकेत मानी जा रही है।

बैठक के दौरान तीन वरिष्ठ विधायकों -- कुणाल घोष, रीताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा -- ने आक्रामक रुख अपनाते हुए पार्टी नेतृत्व पर सीधे सवाल उठाए। ये तीनों विधायक पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाते हैं। इन्होंने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र की हार का मुद्दा उठाया, जहां कुल 266 बूथों में से 207 बूथों पर शुभेंदु अधिकारी आगे रहे। यह एक ऐसा विषय है जो पार्टी के लिए गहरे संकट का प्रतीक बन गया है।

सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि जब ये तीनों विधायक अपनी बात रख रहे थे, तब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों चुपचाप सुनते रहे। टीएमसी के इतिहास में यह पहला मौका माना जा रहा है जब किसी आधिकारिक पार्टी बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने इतनी खुलकर नेतृत्व को चुनौती दी। अब तक पार्टी की बैठकों में केवल ममता और अभिषेक ही बोलते थे और बाकी सदस्य सुनने की भूमिका में रहते थे।

पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस का नेतृत्व मॉडल गंभीर दबाव में है। पार्टी के भीतर बढ़ती बगावत इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता और नेता दोनों बदलाव की मांग कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी नेतृत्व ने इन आंतरिक चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले समय में और अधिक नेता मुखर हो सकते हैं, जिससे पार्टी के लिए एकजुटता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

Sources

Loading article...