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अहमदाबाद में पटाखा फैक्टरी में विस्फोट, नौ की मौत

अहमदाबाद में पटाखा फैक्टरी में विस्फोट, नौ की मौत

गुजरात के अहमदाबाद में एक पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट में मरने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है और करीब दस से पंद्रह लोग घायल हुए हैं। मृतकों में एक महिला भी शामिल है। हादसा शहर के वस्त्राल इलाके में रामोल-गातराड रोड के पास हुआ, जहां बताया जा रहा है कि यह इकाई अवैध रूप से चल रही थी और इसका लाइसेंस पहले ही रद्द किया जा चुका था। धमाका इतना जोरदार था कि उसकी आवाज करीब पांच किलोमीटर दूर तक सुनी गई। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जबकि मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और विस्फोटक अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की टीमें मौके पर पहुंचकर विस्फोट के कारणों और सुरक्षा में हुई चूक की जांच कर रही हैं।

गुजरात के अहमदाबाद में एक पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट में मरने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। शुरुआत में आठ लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, लेकिन राहत कार्य आगे बढ़ने के साथ यह आंकड़ा बढ़ गया। हादसे में करीब दस से पंद्रह लोग घायल भी हुए हैं, जिन्हें आनन-फानन में नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मृतकों में एक महिला भी शामिल बताई जा रही है, और इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है।

यह हादसा शहर के वस्त्राल इलाके में रामोल-गातराड रोड के पास हुआ, जहां यह पटाखा इकाई संचालित हो रही थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार विस्फोट के तुरंत बाद फैक्टरी में आग भी लग गई, जिससे हालात और गंभीर हो गए और वहां काम कर रहे लोगों को बचने का बहुत कम मौका मिला।

धमाका इतना जोरदार था कि उसकी आवाज घटनास्थल से करीब पांच किलोमीटर दूर तक सुनी गई। आसपास के लोग तेज गड़गड़ाहट सुनकर सहम गए और मौके की ओर दौड़ पड़े। विस्फोट की तीव्रता ने इस बात का अंदाजा दे दिया कि इकाई के भीतर बड़ी मात्रा में विस्फोटक और ज्वलनशील सामग्री मौजूद रही होगी।

मिली जानकारी के मुताबिक यह पटाखा फैक्टरी कथित तौर पर अवैध रूप से चलाई जा रही थी। बताया जा रहा है कि इस इकाई का लाइसेंस पहले ही रद्द किया जा चुका था, इसके बावजूद यहां गतिविधियां जारी थीं। यही लापरवाही अब जांच के केंद्र में है, क्योंकि इतने बड़े हादसे के पीछे सुरक्षा नियमों की अनदेखी को अहम वजह माना जा रहा है।

घटना के बाद पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और विस्फोटक अधिनियम के प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया है, और इकाई के संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

विस्फोट के सही कारणों का पता लगाने के लिए फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की टीमें भी घटनास्थल पर पहुंचीं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि धमाका किन परिस्थितियों में हुआ और सुरक्षा इंतजामों में कहां-कहां चूक हुई, ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके और आगे ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को पचास-पचास हजार रुपये देने का ऐलान किया गया है। अवैध रूप से चल रही ऐसी इकाइयों से जुड़े खतरों ने एक बार फिर पटाखा निर्माण में सुरक्षा और निगरानी की गंभीर कमी को उजागर कर दिया है।

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