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डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को 16वीं बार पैरोल पर जेल से रिहा किया गया है। बलात्कार और हत्या के दोषी राम रहीम को बार-बार मिलने वाली पैरोल पर विपक्ष और पीड़ित पक्ष ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को 16वीं बार पैरोल पर जेल से रिहा किया गया है। बलात्कार और हत्या के गंभीर मामलों में दोषी ठहराए गए राम रहीम को बार-बार मिलने वाली पैरोल की रियायत पर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है।
राम रहीम को 2017 में सीबीआई की विशेष अदालत ने डेरा सच्चा सौदा की दो साध्वियों के साथ बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्हें पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या और डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामलों में भी दोषी करार दिया गया था।
इतने गंभीर अपराधों में दोषसिद्ध होने के बावजूद राम रहीम को नियमित अंतराल पर पैरोल और फर्लो दिया जाता रहा है। विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह विशेष रियायत राजनीतिक कारणों से दी जा रही है, क्योंकि डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयायी चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पीड़ित पक्ष के वकीलों ने भी बार-बार पैरोल देने का विरोध किया है और अदालत से अपील की है कि दोषी को इस प्रकार की छूट नहीं दी जानी चाहिए। उनका तर्क है कि इतने गंभीर अपराधों में दोषी व्यक्ति को बार-बार रिहा करना न्याय व्यवस्था का मजाक उड़ाना है और पीड़ितों तथा उनके परिवारों के साथ अन्याय है।
राम रहीम का मामला भारत में पैरोल व्यवस्था की खामियों और इसके राजनीतिकरण पर एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पैरोल का प्रावधान कैदियों के पुनर्वास के लिए है, लेकिन जब इसे बार-बार और बिना उचित कारण के दिया जाता है तो यह न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता को कमजोर करता है।