मुंबई में पश्चिमी एक्सप्रेस वे पर पड़ने वाले भारी ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए एक बड़ी परियोजना पर काम चल रहा है। इसके तहत नरीमन पॉइंट से भायंदर तक एक सिग्नल मुक्त सड़क तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 14 जून को इस कोस्टल रोड परियोजना के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने वर्सोवा से दहिसर तक के हिस्से के काम का जायजा लिया।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मुंबई की सड़कों पर ट्रैफिक का बोझ घटाना है। पश्चिमी एक्सप्रेस वे शहर के करीब 60 प्रतिशत ट्रैफिक को संभालता है। इसी दबाव को कम करने के लिए तटीय मार्ग को एक विकल्प के रूप में तैयार किया जा रहा है। सिग्नल मुक्त सड़क से वाहनों की आवाजाही तेज़ और सुगम होने की उम्मीद है।
यह कोस्टल रोड मुंबई के पश्चिमी तट के सहारे बनाई जा रही है। यह करीब 29.2 किलोमीटर लंबा, टोल मुक्त और आठ लेन का मार्ग है। फिलहाल यह मरीन लाइन्स से कांदिवली तक फैला है, जिसका विस्तार भायंदर तक करने की योजना है। पूरे रास्ते को जोड़ने के बाद यह एक हाई स्पीड कॉरिडोर के रूप में काम करेगा।
अधिकारियों के अनुसार इस मार्ग से यात्रा का समय काफी घट जाएगा। अभी पूरे हिस्से को तय करने में दो घंटे से अधिक का समय लगता है। परियोजना पूरी होने के बाद यह दूरी करीब 40 मिनट में तय की जा सकेगी। इससे रोज़ाना सफर करने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने निर्माण कार्य की प्रगति पर संतोष जताया है। उनका कहना है कि सरकार इस परियोजना को तय समय में पूरा करना चाहती है। परियोजना के पूरा होने का लक्ष्य 2028 तक रखा गया है। इसके लिए अलग-अलग हिस्सों पर तेज़ी से काम किया जा रहा है।
यह परियोजना मुंबई के बुनियादी ढांचे के लिए एक अहम कदम मानी जा रही है। तटीय मार्ग और सिग्नल मुक्त कॉरिडोर मिलकर शहर की यातायात व्यवस्था को काफी हद तक बदल सकते हैं। इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि प्रमुख मार्गों पर भीड़ भी कम होगी। आने वाले वर्षों में इसका असर पूरे महानगर की आवाजाही पर पड़ने की उम्मीद है।
