ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को नई गति देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने राज्यों को बड़ी राशि जारी की है। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों को 25,863 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों को समय पर मजदूरी उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
यह राशि विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण यानी वीबी-जी-रैम-जी योजना के क्रियान्वयन के लिए जारी की गई है। इस योजना से जुड़ा अधिनियम एक जुलाई 2026 से प्रभावी हुआ है और यह पहले से चली आ रही मनरेगा योजना की जगह लाई गई है।
नई योजना के तहत हर ग्रामीण परिवार को एक वर्ष में 125 दिन के मजदूरी रोजगार की गारंटी दी गई है। यह पहले की व्यवस्था की तुलना में अधिक है, जिससे ग्रामीण परिवारों को साल के दौरान अधिक दिनों तक काम मिलने की संभावना बनी है।
योजना के तहत मजदूरी दरों में भी बदलाव किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार मजदूरी दरों में लगभग दस प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है और न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन तय की गई है। इसका उद्देश्य ग्रामीण श्रमिकों को बेहतर पारिश्रमिक सुनिश्चित करना है।
पहली किस्त जारी करते हुए मंत्री ने राज्यों से आग्रह किया कि वे समय पर अपना हिस्सा जारी करें, ताकि श्रमिकों को उनकी मजदूरी का भुगतान तय समय सीमा के भीतर हो सके। इसके तहत मजदूरी भुगतान 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
सरकार का कहना है कि यह पहल गांवों में रोजगार, पारदर्शिता और समावेशी विकास के संकल्प को नई गति देती है। सरकार के अनुसार योजना के पहले सप्ताह में बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों में काम शुरू हुए हैं और लाखों ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
उल्लेखनीय है कि जहां पूर्व की मनरेगा योजना को पूरे देश में लागू होने में काफी समय लगा था, वहीं वीबी-जी-रैम-जी को देशभर में तेजी से लागू किया गया है। पहली किस्त के रूप में जारी की गई यह राशि योजना के क्रियान्वयन और ग्रामीण रोजगार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
