दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित होटल फ्लोरिश इन में सुबह करीब साढ़े सात से आठ बजे के बीच भीषण आग लग गई जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई और 35 से अधिक लोग घायल हो गए। घायलों में से 15 से अधिक आईसीयू में भर्ती हैं और आठ वेंटिलेटर पर हैं।
इस होटल में सिर्फ छह कमरों की अनुमति थी लेकिन 25 कमरे बनाकर चलाए जा रहे थे। होटल बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहा था। मरने वालों में ज्यादातर बांग्लादेश और अफ्रीकी देशों से आए विदेशी नागरिक थे जो सस्ते इलाज के लिए दिल्ली आए थे।
होटल मालवीय नगर की संकरी गलियों में बना था जहां माचिस की डिब्बी जैसी इमारतें एक के बाद एक खड़ी हैं। अंदर जाने और बाहर निकलने का एक ही रास्ता था। जब आग लगी तो अंदर फंसे लोगों को बाहर भागने का कोई रास्ता नहीं बचा।
कई लोगों ने खिड़कियों से कूदकर अपनी जान बचाने की कोशिश की। आसपास के लोगों ने गद्दे बिछाए ताकि कूदने वालों को कम चोट लगे। बिजली के तारों में स्पार्क हो रहा था जिससे नीचे कूदना और भी खतरनाक हो गया था।
होटल के मालिक लवकेश बजाज सहित तीन पार्टनर मिलकर यह होटल करीब दस साल से चला रहे थे। पुलिस और एमसीडी से मिलीभगत कर होटल चलाने का आरोप लग रहा है। बेसमेंट में भी कमरे बनाए गए थे जहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं था।
फायर ब्रिगेड ने आग बुझाने के बाद जब अंदर जांच की तो पाया कि आठ लोग एक कमरे में ताले के अंदर बंद थे। सभी की मौत हो चुकी थी। पूरी बिल्डिंग आग का गोला बन चुकी थी और धुएं और आग के आगे किसी का जोर नहीं चल रहा था।
इस घटना ने दिल्ली में अवैध तरीके से चल रहे होटलों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है लेकिन ऐसी दुर्घटनाएं बार-बार होती रहती हैं।
