भारत सरकार ने चीनी के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को 2026 तक बढ़ाने का फैसला किया है। यह कदम घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों में शुमार भारत के इस फैसले का वैश्विक बाजार पर गहरा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों और आयातक देशों के लिए आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत खोजना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के तहत गन्ने से इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से चीनी की उपलब्धता पर दबाव बना हुआ है। सरकार ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है।
चीनी उद्योग ने प्रतिबंध के विस्तार पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। जहां कुछ मिलों ने घरेलू बाजार की स्थिरता के लिए इसे जरूरी बताया, वहीं निर्यातोन्मुख मिलों ने राजस्व हानि की चिंता जताई है।
वैश्विक खाद्य एजेंसियां इस फैसले पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे प्रमुख उत्पादक देश द्वारा निर्यात प्रतिबंध खाद्य राष्ट्रवाद की प्रवृत्ति को और मजबूत कर सकता है।
