मध्य प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने कई इलाकों को बाढ़ जैसे हालात में डाल दिया है। राज्य के कई निचले इलाकों में भारी जलभराव हो गया है और रिहायशी क्षेत्रों में पानी लगातार बढ़ रहा है। जगह जगह सड़कें दरिया में तब्दील हो गई हैं, मंदिर और घाट पानी में डूबे नजर आ रहे हैं, और लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू का सहारा लेना पड़ रहा है। बारिश का यह दौर आम जनजीवन के लिए बड़ी मुसीबत बनकर सामने आया है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश राज्य की राजधानी भोपाल में दर्ज की गई, जहां 178 मिलीमीटर पानी बरसा। इसके अलावा नर्मदापुरम में 127 मिलीमीटर और रायसेन में 124 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इतनी अधिक बारिश के चलते कई निचले इलाकों में भारी जलभराव हो गया, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ और लोगों को घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया।
बारिश के बीच एक मंदिर की तस्वीरें हालात की गंभीरता बयां कर रही हैं, जहां मंदिर का आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूब गया है। मंदिर के चारों ओर पानी का तेज बहाव है और परिसर पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। ऐसे में सैलाब के बीच फंसे लोगों को नाव के सहारे मंदिर से बाहर निकाला जा रहा है, ताकि किसी तरह की जनहानि से बचा जा सके और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
जलभराव का असर आवाजाही और आपातकालीन सेवाओं पर भी साफ दिखा। कई जगह रास्ते में पानी भर जाने के कारण एंबुलेंस तक मौके पर नहीं पहुंच सकी, जिससे मरीजों और जरूरतमंदों की मुश्किलें और बढ़ गईं। वहीं कोटा उज्जैन नेशनल हाईवे पर पानी भरने से गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह थम गई, जिससे इस अहम मार्ग पर आवागमन ठप पड़ गया और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
राजस्थान बॉर्डर से सटे मध्य प्रदेश के सोयत में बाढ़ के बीच दो लोग एक पेड़ पर फंस गए, जिन्हें बचाने के लिए रेस्क्यू टीम को मशक्कत करनी पड़ी। तेज बहाव और चारों ओर भरे पानी के बीच टीम ने दोनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह घटना दिखाती है कि बारिश और बाढ़ के चलते लोग किस तरह अचानक खतरनाक हालात में फंस रहे हैं और राहत टीमों को लगातार मोर्चे पर जुटे रहना पड़ रहा है।
पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर नदियों पर भी पड़ा है, जिससे कई नदियां उफान पर आ गई हैं और आसपास के गांव पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो गए हैं। लोगों के घरों में कमर तक पानी भर चुका है और रिहायशी इलाकों में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने से गोला घाट के 50 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, जहां रहवासी दिन में तो किसी तरह गुजारा कर रहे हैं, लेकिन रात में स्थिति और बिगड़ने की आशंका से सहमे हुए हैं।
