रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के सड़कों पर उतरने और झारखंड लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों के बीच झारखंड CID ने ठीक उसी समय एक बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांगते को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी उस माहौल में हुई जब छात्र लगातार आयोग की परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे थे और पूरे मामले की जांच की मांग कर रहे थे।
छात्रों के गुस्से की एक बड़ी वजह आयोग का ट्रैक रिकॉर्ड भी है। झारखंड राज्य बने हुए 26 साल हो गए हैं, लेकिन इन 26 सालों में JPSC ने सिर्फ 14 परीक्षाएं ही ली हैं। इतने लंबे अंतराल और गिनी-चुनी परीक्षाओं ने युवाओं में पहले से मौजूद असंतोष को और गहरा कर दिया, और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों ने इस नाराजगी को सड़कों तक पहुंचा दिया।
इस पूरे मामले में छात्रों का सबसे ज्यादा गुस्सा अभय तिवारी को लेकर है। अभय तिवारी इस समय झारखंड CID की गिरफ्त में है और CID ने सबसे पहले उसी को गिरफ्तार किया था। छात्रों के बीच यह चर्चा है कि झारखंड में नौकरी चोरी के सिंडिकेट का किंगपिन वही था, और अब जांच कर रही CID भी अभय तिवारी को इस घोटाले का मास्टरमाइंड मान रही है।
अभय तिवारी पर लगे आरोप सीधे तौर पर भाई-भतीजावाद से जुड़े हैं। बताया जा रहा है कि उसके ममेरे भाई को भी JPSC CGL के जरिए सरकारी नौकरी मिली। छात्रों और स्थानीय रिपोर्टिंग के अनुसार परीक्षा में अभय तिवारी ने ऐसी कथित 'परिवार कल्याण स्कीम' चलाई कि उसके भाई और भाभी से लेकर साले और साढ़ू के बेटे तक, सब एक ही बार में 'साहब' बन गए। यही आरोप छात्रों के आक्रोश को हवा देते रहे हैं।
गिरफ्तारी के तार एक निजी कंपनी तक भी पहुंचते हैं। अभय तिवारी सरकारी नौकरी करते हुए TDPL नाम की एक प्राइवेट कंपनी का मार्केटिंग मैनेजर भी था। आरोप है कि इसी TDPL कंपनी को झारखंड में नौकरी वाली परीक्षाएं कंडक्ट कराने का ठेका दिया गया। सवाल इस बात पर है कि झारखंड लोक सेवा आयोग ने एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL को end-to-end सारे काम कैसे सौंप दिए।
छात्रों का कहना है कि उनके सामने अब नौकरी चोरी की पूरी तस्वीर साफ है। इसी वजह से उनकी मांग है कि इस पूरी प्रक्रिया के तहत जो भी परीक्षाएं कराई गई हैं, उन सभी को रद्द किया जाए। प्रदर्शनकारी छात्र इसे केवल एक-दो परीक्षा तक सीमित मामला नहीं मानते, बल्कि भर्ती व्यवस्था की जड़ों तक फैली गड़बड़ी के रूप में देख रहे हैं।
इस मामले का राजनीतिक पहलू भी तेज होता जा रहा है। प्रदर्शनकारी और विपक्षी नेता सवाल उठा रहे हैं कि क्या अभय तिवारी झारखंड में नौकरी बेचने का यह सिंडिकेट अकेले चला रहा था। उनका आरोप है कि इसी वजह से हेमंत सोरेन सरकार CBI जांच से बच रही है और छात्रों पर लाठी चला रही है, जबकि सरकार की ओर से CID और ED से जांच कराने की बात कही जा रही है।
