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सीबीएसई की गड़बड़ी से छात्रों के अंक उम्मीद से कम, इंजीनियरिंग काउंसलिंग से पहले पुनर्मूल्यांकन पूरा होने की चिंता

सीबीएसई की गड़बड़ी से छात्रों के अंक उम्मीद से कम, इंजीनियरिंग काउंसलिंग से पहले पुनर्मूल्यांकन पूरा होने की चिंता | AVALW News

सीबीएसई की परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी के कारण कई छात्रों के अंक उम्मीद से कम आए हैं। छात्रों को चिंता है कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी होने से पहले इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन की काउंसलिंग समाप्त हो जाएगी, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो सकता है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई की परीक्षा प्रणाली में आई गड़बड़ी के कारण बड़ी संख्या में छात्रों के अंक उम्मीद से काफी कम आए हैं। इस स्थिति ने देश भर के लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों में गहरी चिंता और निराशा पैदा कर दी है। प्रभावित छात्रों का कहना है कि उन्होंने दो साल तक कड़ी मेहनत की लेकिन परिणाम उनकी तैयारी को प्रतिबिंबित नहीं करते।

छात्रों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और संभवतः समाप्त भी हो जाएगी। इसका मतलब यह होगा कि जिन छात्रों के अंक गलती से कम आए हैं वे अपनी पसंद के कॉलेज और ब्रांच में दाखिला नहीं ले पाएंगे।

एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार प्रभावित छात्रों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि ये सभी बेहद मेहनती बच्चे हैं जिन्होंने बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में पूरा समर्पण दिया था। परिणामों में आई विसंगतियों ने उन्हें मानसिक रूप से भी प्रभावित किया है और उनके आत्मविश्वास पर गहरा आघात किया है।

पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में सामान्यतः कई सप्ताह का समय लगता है जबकि इंजीनियरिंग कॉलेजों की काउंसलिंग एक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चलती है। इन दोनों प्रक्रियाओं के बीच तालमेल नहीं होने की स्थिति में छात्रों को अपने उचित अंक मिलने से पहले ही एडमिशन के अवसर खोने का खतरा है।

शिक्षा विशेषज्ञों ने सीबीएसई से मांग की है कि वे पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया को तेज करें और संबंधित विश्वविद्यालयों तथा तकनीकी संस्थानों से समन्वय करें ताकि किसी भी छात्र का भविष्य बोर्ड की गड़बड़ी के कारण प्रभावित न हो। काउंसलिंग की तिथियों में आवश्यक समायोजन की भी मांग की जा रही है।

सीबीएसई ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। छात्रों और अभिभावकों के संगठन बोर्ड से पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

यह स्थिति भारत की परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करती है। हर साल लाखों छात्रों का भविष्य बोर्ड परीक्षाओं के अंकों पर निर्भर करता है और ऐसे में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का प्रभाव बेहद गंभीर होता है। विशेषज्ञ मांग कर रहे हैं कि मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्रुटि-मुक्त बनाने के लिए तकनीकी समाधानों को अपनाया जाए।

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