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FII की बिकवाली को DII ने कैसे रोक दिया

इशा राव इशा राव isharaoreports.avalw.com · 516 reads Respect0 Save Share Read only
READS1live count PUBLISHED11 Oct2026 READING TIME3 min622 words LANGUAGEHindi
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अक्टूबर 2026 में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों की रिकॉर्ड खरीदारी ने भारतीय शेयर बाजार को गिरावट से बचाया है। जानिए इस 'टग ऑफ वॉर' के पीछे की वजहें।

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लेकिन कहानी के दूसरे पक्ष में एक अहम बदलाव हुआ है। इसी हफ्ते, जब विदेशी निवेशकों ने बाजार से 30,294 करोड़ रुपये निकाले, तो घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 30,313 करोड़ रुपये का निवेश किया। यह संयोग नहीं, बल्कि एक रणनीतिक सहारा है जिसने बाजार को क्रैश से बचाया। अब आइए समझते हैं कि इस 'टग ऑफ वॉर' में कौन-कौन है और बाजार का भविष्य क्या तय कर रहा है।

अक्टूबर का गणित और बाजार का सहारा

बजाज ब्रोकिंग के रिसर्च डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पवित्र मुखर्जी के अनुसार, अक्टूबर महीने की शुरुआत से अब तक विदेशी निवेशकों ने कुल 39,779 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इसके बिल्कुल विपरीत, घरेलू निवेशकों ने 40,355 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। इसी सपोर्ट के चलते, सितंबर के अंत में 22,620.45 के स्तर पर बंद होने वाले निफ्टी में अब तक सिर्फ 0.44 फीसदी की मामूली गिरावट आई है।

यह आंकड़े बताते हैं कि बाजार की दिशा अब केवल विदेशी फंड्स की प्रवाह पर निर्भर नहीं रही है। घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी ने पिछले आठ हफ्तों में निफ्टी की 7.57 फीसदी की गिरावट को 24,366 से 22,520 तक सीमित रखा है। यह एक स्पष्ट संकेत है कि भारतीय बाजार में अब एक स्थिर आधार बन रहा है जो बाहरी उथल-पुथल को सोखने की क्षमता रखता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को संभाला।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को संभाला।

विदेशी बिकवाली की वजहें और वैश्विक संकेत

विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे कई वैश्विक कारक काम कर रहे हैं। सबसे बड़ी वजह अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.36 फीसदी के करीब पहुंचना है। जब सुरक्षित सरकारी बॉन्ड्स में उच्च रिटर्न मिल रहा है, तो उभरते बाजारों में जोखिम उठाने की मजबूरी कम हो जाती है। इसके अलावा, 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चल रहा ब्रेंट क्रूड और कमजोर होता हुआ रुपया भी भारतीय बाजार पर दबाव बना रहा है।

पीएल कैपिटल की स्टडी के मुताबिक, सितंबर 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 35,861 करोड़ रुपये निकाले थे। इसमें से सबसे ज्यादा बिकवाली फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर से हुई, जहां से 13,147 करोड़ रुपये निकाले गए। यह रकम उनके लॉन्ग टर्म एवरेज मासिक आउटफ्लो से लगभग छह गुना ज्यादा है। ऐसे में, जब तक वैश्विक ब्याज दरें उच्च रहेंगी, विदेशी निवेशक सतर्क रहेंगे।

भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के बावजूद बाजार पर वैश्विक दबाव बना हुआ है।
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के बावजूद बाजार पर वैश्विक दबाव बना हुआ है।

घरेलू निवेशकों की भूमिका और बाजार की संरचना

जिफ़ेरीज के हेड ऑफ इक्विटीज क्रिस वुड के अनुसार, भारतीय बाजार की संरचना बदल रही है। टॉप 20 शेयरों का बाजार पूंजीकरण में हिस्सा 2020 में 44 फीसदी था, जो अब 27 फीसदी तक घट गया है। इसका मतलब है कि मिड और स्मॉल कैप शेयरों में निवेश बढ़ रहा है, जो भारतीय बाजार की गहराई और चौड़ाई को दर्शाता है। महीने के औसत 38,800 करोड़ रुपये का घरेलू म्यूचुअल फंड इनफ्लो भी इसी बदलाव का सबूत है।

अंबारेश बालिगा, एक स्वतंत्र बाजार विश्लेषक, का मानना है कि AI शेयरों में होने वाली संभावित कorreksion विदेशी निवेशकों को वापस भारत की ओर मोड़ सकती है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सातवा सबसे बड़ा शेयर बाजार है और इसमें विभिन्न सेक्टर्स की उपलब्धता है। पिछले दो वर्षों में 45 अरब डॉलर के विदेशी निवेश निकलने के बावजूद बाजार क्रैश नहीं हुआ, बल्कि संभलकर बना रहा, जो इसकी मजबूती का संकेत है।

स्थिरता और लंबी अवधि के निवेश की ओर रुझान बढ़ रहा है।
स्थिरता और लंबी अवधि के निवेश की ओर रुझान बढ़ रहा है।

अगले हफ्ते क्या देखें

आने वाले हफ्ते निवेशकों की नजर भारत और अमेरिका के महंगाई आंकड़ों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी। रवि सिंह, मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफिसर, के मुताबिक, 22,150 से 22,200 का दायरा निफ्टी के लिए बेहद अहम सपोर्ट जोन है। अगर इंडेक्स इस स्तर के ऊपर टिकता है, तो यह 22,750 और फिर 23,000 की ओर रिकवर कर सकता है।

हालांकि, बाजार अभी भी वैश्विक दबाव और विदेशी बिकवाली के बीच 'टग ऑफ वॉर' में है। सतर्कता जरूरी है, लेकिन घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी यह सुनिश्चित करती है कि बाजार की नींव कमजोर नहीं हो रही है। निवेशकों को अब केवल बाहरी संकेतों पर नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और घरेलू पूंजी के प्रवाह पर भी ध्यान देना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्टूबर 2026 में भारतीय शेयर बाजार में DII और FII के बीच कैसा संतुलन बना?

घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 30,313 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिसने विदेशी निवेशकों के 30,294 करोड़ रुपये के आउटफ्लो को पूरी तरह कवर कर दिया। इस रणनीतिक सहारे से बाजार को गिरावट से बचाया गया और निफ्टी 50 में सिर्फ 0.44 फीसदी की मामूली गिरावट आई।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के पीछे मुख्य वैश्विक कारण क्या हैं?

अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के 5.36 फीसदी के करीब पहुंचने से सुरक्षित बॉन्ड्स में रिटर्न बढ़ गया, जिससे उभरते बाजारों में जोखिम उठाने की प्रवृत्ति कम हुई। इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने और कमजोर रुपये ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बनाया।

भारतीय शेयर बाजार की संरचना में पिछले कुछ वर्षों में क्या बदलाव हुआ है?

टॉप 20 शेयरों का बाजार पूंजीकरण में हिस्सा 2020 में 44 फीसदी था, जो अब 27 फीसदी तक घट गया है। यह बदलाव मिड और स्मॉल कैप शेयरों में निवेश की ओर बढ़े हुए रुझान को दर्शाता है, जो बाजार की गहराई और चौड़ाई को बढ़ा रहा है।

निफ्टी 50 के लिए अगले हफ्ते कौन सा स्तर सबसे अहम सपोर्ट जोन माना जा रहा है?

मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह के अनुसार, 22,150 से 22,200 का दायरा निफ्टी के लिए बेहद अहम सपोर्ट जोन है। यदि इंडेक्स इस स्तर के ऊपर टिकता है, तो यह 22,750 और फिर 23,000 की ओर रिकवर कर सकता है।

सितंबर 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने सबसे ज्यादा किस सेक्टर से निवेश निकाला?

पीएल कैपिटल की स्टडी के मुताबिक, सितंबर 2026 में सबसे ज्यादा बिकवाली फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर से हुई, जहां से 13,147 करोड़ रुपये निकाले गए। यह रकम उनके लॉन्ग टर्म एवरेज मासिक आउटफ्लो से लगभग छह गुना ज्यादा है।

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