एफआईआई की लगातार बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को गिरावट से बचाया, लेकिन इस स्थिरता के पीछे की गहरी सवालिया निशानी जानने के लिए पढ़ें।
शुक्रवार को जब बाजार में गिरावट की हवा चल रही थी, तो एक अजीब सा संतुलन नजर आया। एक तरफ विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार आठवें हफ्ते से शेयर बेच रहे थे, तो दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशक ने बिकवाली को पूरी तरह सोख लिया। इस सप्ताह एफआईआई ने 30,294 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि डीआईआई ने 30,313 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
यह केवल एक हफ्ते की कहानी नहीं है। पिछले आठ हफ्तों में निफ्टी 7.57 प्रतिशत गिरा, लेकिन यह गिरावट उस समय की तुलना में सीमित रही जब बाजार में घरेलू निवेशकों की भारी खरीदारी नहीं हो रही थी। इस संतुलन ने बाजार को गहरी गिरावट से बचाया, लेकिन यह सवाल उठता है कि यह स्थिरता कितनी देर तक टिकेगी जब तक विदेशी निवेशक बाजार से दूर हैं?
सेक्टरवार बिकवाली की गहराई
विदेशी निवेशकों की बिकवाली सभी सेक्टरों में समान नहीं थी। PL कैपिटल की रिसर्च के अनुसार, सितंबर 2026 में फाइनेंशियल सर्विसेज़ सेक्टर से सबसे ज़्यादा 13,147 करोड़ रुपये की निकासी हुई। यह राशि अगस्त में हुए 10,494 करोड़ रुपये के इनफ्लो के मुकाबले एक बड़ा बदलाव है और इसके 2,237 करोड़ रुपये के लॉन्ग टर्म एवरेज मासिक आउटफ्लो से लगभग छह गुना ज़्यादा है।
फाइनेंशियल सर्विसेज़ के अलावा एनर्जी, ऑटोमोबाइल और मेटल जैसे सेक्टरों में भी बिकवाली देखी गई। हालांकि, कुछ चुनिंदा सेक्टरों में विदेशी निवेश आता रहा। कंज्यूमर सर्विसेज़ में सबसे ज़्यादा 2,333 करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज किया गया, जो लगातार चौथा महीना था जब इसमें पॉज़िटिव फ्लो देखा गया। इसके बाद सर्विसेज़ (2,302 करोड़ रुपये), हेल्थकेयर (2,117 करोड़ रुपये) और कंस्ट्रक्शन (1,311 करोड़ रुपये) का नंबर रहा।

घरेलू निवेशकों की रफ़्तार
डीआईआई की खरीदारी केवल एक हफ्ते की गड़बड़ी नहीं है, बल्कि यह एक लंबी अवधि का रुझान है। बजाज ब्रोकिंग के पवित्रो मुखर्जी के अनुसार, महीने की शुरुआत से अब तक डीआईआई ने 40,355 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी की है, जबकि एफआईआई ने 39,779 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की है। इससे निफ्टी सितंबर के आखिर में 22,620.45 के क्लोजिंग लेवल से 0.44 प्रतिशत नीचे आया है।
यह स्थिति बाजार के लिए एक दोहरी तलवार है। एक तरफ डीआईआई की खरीदारी ने बाजार को गहरी गिरावट से बचाया, लेकिन दूसरी तरफ यह यह भी दिखाता है कि घरेलू निवेशक बाजार में अकेले खड़े हैं। जब विदेशी निवेशक बाजार से दूर हैं, तो बाजार की गहराई और लिक्विडिटी पर प्रभाव पड़ता है, जिससे उतार चढ़ाव और ज़्यादा हो सकता है।

लंबी अवधि का नज़रिया
PL कैपिटल की रिसर्च एनालिस्ट मन्नत गांधी के अनुसार, लंबे समय के नज़रिए से तिमाही होल्डिंग डेटा भी यही कहानी बताता है, जिसमें एफआईआई का वेटेज धीरे-धीरे बैंकों और आईटी से हटकर इलेक्ट्रिकल और नॉन फेरस मेटल्स जैसे सेक्टरों की ओर बढ़ रहा है। यह बदलाव दिखाता है कि विदेशी निवेशक अपनी रणनीति बदल रहे हैं और वे वेलेबल सेक्टरों की ओर झुकाव दिखा रहे हैं।
हालांकि, एनालिस्ट का कहना है कि आगे चलकर एफआईआई की बिकवाली और ग्लोबल चुनौतियों के कारण बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की रिकॉर्ड खरीदारी से गिरावट सीमित रही है, लेकिन यह स्थिति कितनी देर तक टिकेगी, यह समय ही बताएगा।

निवेशकों के लिए क्या संदेश है
वर्तमान बाजार की स्थिति निवेशकों के लिए एक जटिल पहेली है। एक तरफ डीआईआई की खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया है, लेकिन दूसरी तरफ एफआईआई की लगातार बिकवाली यह संकेत देती है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार के भविष्य को लेकर सावधान हैं। यह स्थिति निवेशकों को सतर्क रहने के लिए मजबूर करती है।
निवेशकों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे बाजार के घरेलू और विदेशी निवेशकों के बीच के संतुलन को समझें और अपनी निवेश रणनीति को इसी के अनुसार तैयार करें। जब तक विदेशी निवेशक बाजार में वापस नहीं आते, तब तक बाजार की गहराई और लिक्विडिटी पर प्रभाव पड़ता रहेगा, जिससे उतार चढ़ाव और ज़्यादा हो सकता है।
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