झुंझुनूं में नींबू का भाव सेब और अनार से भी ऊपर चढ़ गया है। जानिए बारिश में इसकी कीमतें क्यों उल्टी घूम गईं और इसका असर होटल-ढाबों पर कैसे पड़ रहा है।
झुंझुनूं के बाजारों में एक अजीब नजारा है। वहां नींबू अब सेब और अनार से भी महंगा हो गया है। खुदरा बाजार में एक नींबू 10 से 15 रुपये में बिक रहा है, जो सामान्यतः एक आम कीमत नहीं है।
यह केवल एक फल की कमी नहीं है, यह घर के बजट पर सीधा प्रहार है। गृहिणियां अब खरीदते समय सोचती हैं कि क्या आज नींबू का इस्तेमाल करना जरूरी है। इस छोटे से बदलाव ने पूरे खाने के स्वाद और घर के खर्च को बदल दिया है।
बारिश में महंगाई का उल्टा खेल
आमतौर पर सितंबर और अक्टूबर के महीनों में नींबू की आवक बढ़ती है। उस समय भाव 60 से 70 रुपये किलो तक आ जाते हैं, और कभी-कभी 20 से 30 रुपये भी हो जाते हैं। लेकिन इस बार बाजार में उल्टा रुख देखने को मिल रहा है।
व्यापारियों के अनुसार, पानी की कमी के कारण मध्य प्रदेश के क्षेत्रों से पर्याप्त मात्रा में फसल नहीं पहुंच पा रही है। इससे बाजार में उपलब्धता घट गई है और कीमतें लगातार बढ़ती गई हैं। अब अच्छी गुणवत्ता का नींबू 160 से 200 रुपये किलो तक बिक रहा है।
करीब 15 दिन पहले थोक भाव लगभग 100 रुपये किलो था। इस तेजी का असर सीधे खुदरा बाजार पर पड़ा है। यह महंगाई सिर्फ खरीदारों को नहीं, बल्कि दुकानदारों को भी परेशान कर रही है।

होटल-ढाबों की जेब पर प्रहार
होटल और ढाबों के लिए नींबू हर थाली में जरूरी होता है। लेकिन अब 200 रुपये किलो के भाव पर इसकी नियमित आपूर्ति करना खर्चीला हो गया है। व्यापारियों का मानना है कि यह अब उनके लिए एक भारी बोझ बन रहा है।
जहां पहले सलाद के साथ नींबू मिलना सामान्य माना जाता था, वहीं अब ऐसा नहीं है। होटल संचालकों को हर ग्राहक की थाली में नींबू देना अब खर्च बढ़ाने वाला सौदा बन गया है। इसका असर सीधे उनके मुनाफे पर पड़ रहा है।

घरेलू बजट पर पड़ रहा असर
इंदिरा नगर निवासी गृहिणी नीतू बताती हैं कि नींबू रोजमर्रा की जरूरत की चीज है। लेकिन अब इसकी कीमत बढ़ने से घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। इसे खरीदते समय भी सोचना पड़ता है।
मान नगर निवासी सुमित्रा का कहना है कि पहले सामान्य जरूरत के हिसाब से खरीद लेते थे। लेकिन अब एक नींबू 10 से 15 रुपये का मिलने से जरूरत के मुताबिक ही खरीदना पड़ रहा है। महंगाई के कारण इसका इस्तेमाल भी कम करना पड़ रहा है।
इसका असर सिर्फ खर्च पर नहीं, बल्कि घर की थाली के स्वाद पर भी पड़ रहा है। लोग अब नींबू को एक लक्जरी की तरह ही देखने लगे हैं, जो पहले उनकी रोजमर्रा की आदत थी।

व्यापारियों का नुकसान का डर
खुदरा विक्रेता विजेंद्र बताते हैं कि नींबू के थोक और खुदरा भाव में तेजी से कारोबार प्रभावित हो रहा है। महंगा होने के कारण ग्राहक कम मात्रा में खरीद रहे हैं, जिससे बिक्री घट रही है।
नींबू जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए ज्यादा माल खरीदना जोखिम भरा है। यदि बिक्री नहीं हुई तो खराब होने से नुकसान उठाना पड़ सकता है। व्यापारी अब सावधानी से ही माल खरीद रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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