FII की लगातार बिकवाली के बीच रिटेल निवेशकों ने IPO बाज़ार में 2.47 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड इंटरेस्ट दिखाया।
सितंबर 2026 के आखिरी हफ्ते की बात है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाज़ार से 30,294 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह आठवें लगातार हफ्ता था जब उन्होंने नेट सेलर की भूमिका निभाई। बाज़ार की हवा में खट्टसपन था, नफ़्त की कीमतें ऊँची थीं और बॉन्ड यील्ड्स बढ़े हुए थे। ऐसे में तर्कसंगत प्रतिक्रिया यह मानी जा सकती थी कि निवेशक बाज़ार से दूर हटेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसके बजाय, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 30,313 करोड़ रुपये की खरीदारी की। उन्होंने FII की बिकवाली को लगभग पूरी तरह सोख लिया। इसी कड़ी में, रिटेल निवेशकों का रुख भी अलग है। वित्त वर्ष 2027 के पहले छह महीनों में रिटेल ने IPOs में 2.47 लाख करोड़ रुपये का आवेदन किया। यह राशि उसी अवधि में IPOs के जमा पूंजी (मोबाइलेशन) से 181 प्रतिशत अधिक है। यानी, जब बाज़ार गिर रहा था, तब भी आम निवेशक नई कंपनियों में पैसा लगा रहे थे।
विदेशी भागना और घरेलू खरीदारी
PL कैपिटल की एक हालिया स्टडी के अनुसार, सितंबर 2026 में FPIs ने भारतीय इक्विटी से 35,861 करोड़ रुपये निकाले। यह अगस्त 2026 में हुए 29,628 करोड़ रुपये के नेट इनफ्लो के मुकाबले एक बड़ा बदलाव है। सितंबर में फाइनेंशियल, एनर्जी, ऑटोमोबाइल और मेटल जैसे सेक्टरों में बिकवाली देखी गई। सबसे ज़्यादा निकासी फाइनेंशियल सर्विसेज़ सेक्टर से हुई, जहाँ 13,147 करोड़ रुपये बाहर गए।
दूसरी ओर, कुछ सेक्टरों में विदेशी निवेश आता रहा। कंज्यूमर सर्विसेज़ में 2,333 करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज किया गया, जो चौथे लगातार महीने में पॉज़िटिव फ्लो था। सर्विसेज़, हेल्थकेयर और कंस्ट्रक्शन सेक्टरों में भी पैसे की प्रवाह जारी रहा। PL कैपिटल की रिसर्च एनालिस्ट मन्नत गांधी का कहना है कि लंबे समय के नज़रिए से FII का वेटेज धीरे-धीरे बैंकों और IT से हटकर इलेक्ट्रिकल और नॉन-फेरस मेटल्स जैसे सेक्टरों की ओर बढ़ रहा है।

IPO बाज़ार की रिकॉर्ड फंडराइजिंग
PRIME Database Group के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 78 कंपनियों ने 94,205 करोड़ रुपये जुटाए। यह पिछले साल के इसी अवधि के रिकॉर्ड 69,533 करोड़ रुपये से 35 प्रतिशत अधिक है। यह फंडराइजिंग तब हुई जब सेकेंडरी बाज़ार काफी वोलटाइल रहा। Nifty और Sensex ने इस अवधि में क्रमशः 1.3 प्रतिशत और 0.7 प्रतिशत का ही रिटर्न दिया।
इसके बावजूद, लिस्टिंग डे के रिटर्न में सुधार देखा गया। 64 IPOs में से 36, यानी 56 प्रतिशत, ने लिस्टिंग पर 10 प्रतिशत से अधिक लाभ दिया। पिछले साल के इसी अवधि में यह आंकड़ा 31 प्रतिशत था। ESDS Software Solution ने 109 प्रतिशत, Tempsens Instruments ने 96 प्रतिशत और SS Retail ने 80 प्रतिशत का लिस्टिंग रिटर्न दिया।

रिटेल का विश्वास: आँकड़ों में
रिटेल निवेशकों का IPOs में रुझान स्पष्ट है। 64 IPOs के लिए उपलब्ध सब्सक्रिप्शन डेटा के अनुसार, रिटेल ने 2.47 लाख करोड़ रुपये के शेयरों के लिए आवेदन किया। यह राशि उन्हीं 64 IPOs के कुल जमा पूंजी से 181 प्रतिशत अधिक है। प्रति IPO औसतन रिटेल आवेदन भी बढ़े हैं, जो पिछले साल के 12.69 लाख से बढ़कर 17.71 लाख हो गए हैं।
29 सितंबर तक, 64 IPOs में से 46, यानी 72 प्रतिशत, अपनी इश्यू प्राइस से ऊपर ट्रेड कर रहे थे। इन 64 IPOs का औसत रिटर्न 32 प्रतिशत रहा, जो कि विस्तृत बाज़ार की गिरावट के बावजूद एक सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि रिटेल निवेशक नई कंपनियों के मूल्य को समझ रहे हैं और उनमें निवेश करने के लिए तैयार हैं।

आगे की राह: क्या बदलेगा?
स्वतंत्र बाज़ार विश्लेषक अम्बारेश बालिगा का कहना है कि AI स्टॉक्स की संभावित सुधार (कॉरैक्शन) विदेशी निवेशकों को भारत की ओर लौटा सकती है। उन्होंने कहा, 'AI-संबंधी उत्साह ने वैल्यूएशन को आसमान छूने दिया है, और मुझे लगता है कि यह बुबल जल्द ही फट सकता है।' बालिगा का मानना है कि भारत का बाज़ार विविध है और लंबे समय की ग्रोथ अवसर देता है, जो कि AI-केंद्रित बाज़ारों की तुलना में बेहतर है।
हालाँकि, बालिगा ने एक शर्त भी रखी है। उनका कहना है कि विदेशी निवेशकों के लिए एक स्थिर रुपये की आवश्यकता है। एक गिरता बाज़ार और कमज़ोर रुपये का संयोजन विदेशी निवेशकों के लिए एक दोगुना बोझ है। यदि रुपये स्थिर रहते हैं और AI बुबल फटता है, तो भारत को विदेशी पूंजी की वापसी देखने का अच्छा मौका मिल सकता है।
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