आइची नागोया एशियाई खेल 2026 में भारत का 73 सदस्यीय एथलेटिक्स दल उतर रहा है, लेकिन इस बार भाला फेंक के दिग्गज नीरज चोपड़ा टखने की चोट के कारण मैदान से बाहर हैं। जानिए गत चैंपियनों और नए सितारों पर टिकी उम्मीदों की पूरी कहानी।
नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी
भारतीय खेलप्रेमियों के लिए सबसे बड़ी खबर यही है कि ओलंपिक चैंपियन और गत एशियाई खेलों के स्वर्ण विजेता नीरज चोपड़ा इस बार मैदान पर नहीं दिखेंगे। रिपोर्टों के अनुसार अठाईस वर्षीय इस स्टार भाला फेंक खिलाड़ी को टखने में लिगामेंट की चोट लग गई है, जिसके चलते उन्हें बाकी सीज़न से बाहर रहना पड़ रहा है। हांगझोऊ में उन्होंने अठासी दशमलव अठासी मीटर की दूरी के साथ स्वर्ण जीता था, इसलिए उनकी गैरमौजूदगी दल के लिए एक बड़ी कमी मानी जा रही है।
चोट की पूरी कहानी
मिली जानकारी के मुताबिक नीरज को यह चोट स्विट्ज़रलैंड के लॉज़ेन में हुए मुकाबले के बाद लगी, जहां उन्होंने इस सीज़न का अपना सर्वश्रेष्ठ अठासी दशमलव शून्य पांच मीटर का थ्रो फेंका था। इस चोट के कारण उन्हें ब्रसेल्स में होने वाले डायमंड लीग फाइनल से भी हटना पड़ा। खेलों की दुनिया में इस तरह की चोटें कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन सीज़न के इतने अहम पड़ाव पर किसी बड़े खिलाड़ी का बाहर होना पूरे दल की रणनीति पर असर डालता है और युवाओं पर ज़िम्मेदारी बढ़ा देता है।
तिहत्तर सदस्यों का मज़बूत दल
एक बड़े नाम की गैरमौजूदगी के बावजूद भारत का एथलेटिक्स दल किसी भी लिहाज़ से कमज़ोर नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार इस बार भारत की ओर से तिहत्तर सदस्यीय एथलेटिक्स दल आइची नागोया के मैदान में उतर रहा है। इस दल में अनुभव और युवा जोश का बेहतरीन संतुलन देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि इनमें से सोलह खिलाड़ी ऐसे हैं जो पिछले हांगझोऊ संस्करण में पदक जीत चुके हैं, यानी बड़े मंच पर प्रदर्शन करने का दबाव झेलने का अनुभव इनके पास पहले से मौजूद है।
गत चैंपियनों पर नज़र
इस दल की सबसे बड़ी ताकत वे पांच खिलाड़ी हैं जो पिछली बार अपने अपने वर्ग में स्वर्ण जीतकर आए थे और इस बार अपने खिताब का बचाव करने उतरेंगे। गत चैंपियन के तौर पर उतरना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इसके साथ उम्मीदों का भारी बोझ भी जुड़ा होता है। इन अनुभवी चेहरों से देश को सबसे ज़्यादा पदक की आस है, और यही खिलाड़ी नए सदस्यों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का काम भी करेंगे, जिससे पूरे दल का मनोबल ऊंचा बना रहे।
अविनाश साबले की चुनौती
इन गत चैंपियनों में सबसे चर्चित नाम अविनाश साबले का है, जो तीन हज़ार मीटर स्टीपलचेज़ में देश की सबसे बड़ी उम्मीद माने जाते हैं। लंबी दूरी की इस कठिन दौड़ में उनका दबदबा किसी से छिपा नहीं है और वे लगातार अपने प्रदर्शन से नए मानक गढ़ते रहे हैं। बाधाओं और पानी के गड्ढों से भरी इस स्पर्धा में शारीरिक ताकत के साथ साथ अपार धैर्य की भी ज़रूरत होती है। साबले से देश को एक बार फिर स्वर्ण पदक की पूरी उम्मीद है, जिसके लिए वे कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
तूर की हैट्रिक की तलाश
एक और बड़ा नाम गोला फेंक के खिलाड़ी तेजिंदरपाल सिंह तूर का है, जो इस बार इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतरेंगे। रिपोर्टों के मुताबिक वे लगातार तीसरी बार एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने की कोशिश करेंगे, जो अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि होगी। गोला फेंक जैसी ताकतवर स्पर्धा में इतने लंबे समय तक शीर्ष पर बने रहना उनके अनुशासन और लगन को दर्शाता है। अगर वे सफल रहे तो यह भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक सुनहरा अध्याय जोड़ देगा।
अन्नू रानी और भाला
पुरुष भाला फेंक में भले ही नीरज मौजूद न हों, लेकिन महिला वर्ग में देश की उम्मीदें अन्नू रानी पर टिकी हैं, जो गत चैंपियन के रूप में उतर रही हैं। भारतीय महिला भाला फेंक को नई पहचान दिलाने वाली अन्नू ने बरसों की मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। उनका अपने खिताब का बचाव करने उतरना पूरे दल के लिए एक सकारात्मक संदेश है। उनके अनुभव और तकनीक के दम पर देश को एक और पदक की उम्मीद है, जो महिला एथलीटों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।
राष्ट्रीय रिकॉर्डों की बरसात
इस दल के आत्मविश्वास के पीछे एक बड़ी वजह इस साल का शानदार प्रदर्शन भी है। रिपोर्टों के अनुसार इस पूरे सीज़न में भारतीय एथलीटों ने कुल बीस राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़े हैं, जो अपने आप में एक बड़ी बात है। इतनी बड़ी संख्या में रिकॉर्ड टूटना यह दर्शाता है कि देश में एथलेटिक्स का स्तर लगातार ऊपर उठ रहा है और नई प्रतिभाएं तेज़ी से उभर रही हैं। यही बढ़ता हुआ स्तर बड़े आयोजनों में बेहतर नतीजों की मज़बूत ज़मीन तैयार करता है।
पदकों का लक्ष्य

इन सब तैयारियों और प्रदर्शनों को देखते हुए भारत ने इस बार पदकों को लेकर बड़ा लक्ष्य तय किया है। रिपोर्टों के मुताबिक एथलेटिक्स में देश के पच्चीस से अधिक पदक जीतने की उम्मीद है, और अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो यह आंकड़ा तीस के करीब भी पहुंच सकता है। यह लक्ष्य दिखाता है कि भारतीय एथलेटिक्स अब सिर्फ हिस्सा लेने नहीं, बल्कि दबदबा बनाने के इरादे से मैदान में उतर रहा है, जो देश के लिए बेहद उत्साहजनक संकेत है।
आइची नागोया का मंच
इस बार एशियाई खेलों की मेज़बानी जापान का आइची नागोया क्षेत्र कर रहा है, जहां उन्नीस सितंबर से चार अक्टूबर के बीच खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। एशिया के अलग अलग देशों के हज़ारों खिलाड़ी यहां अपने अपने देश का मान बढ़ाने पहुंच रहे हैं। इस विशाल मंच पर एथलेटिक्स हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है, क्योंकि यहीं सबसे ज़्यादा पदक दांव पर लगे होते हैं। भारतीय दल के लिए यह मंच खुद को साबित करने का एक सुनहरा अवसर है।
युवा और अनुभव का मेल
इस दल की सबसे खूबसूरत बात यही है कि इसमें अनुभवी दिग्गजों के साथ साथ कई नए और उभरते हुए चेहरे भी शामिल हैं। बड़े खिलाड़ी जहां अपने अनुभव से दल को स्थिरता देते हैं, वहीं युवा एथलीट अपनी ऊर्जा और निडरता से नई ऊंचाइयों को छूने का हौसला रखते हैं। इस तरह का संतुलन किसी भी दल को लंबी दौड़ में मज़बूत बनाता है। नीरज जैसे बड़े नाम की गैरमौजूदगी में यही युवा जोश और अनुभव का मेल भारत की सबसे बड़ी पूंजी साबित हो सकता है।
भारत की उम्मीदें
कुल मिलाकर, नीरज चोपड़ा की कमी ज़रूर खलेगी, लेकिन भारत का यह एथलेटिक्स दल पूरे आत्मविश्वास और तैयारी के साथ मैदान में उतर रहा है। गत चैंपियनों का अनुभव, युवा खिलाड़ियों का जोश और इस सीज़न का बेहतरीन प्रदर्शन, ये सभी मिलकर एक उज्ज्वल तस्वीर पेश करते हैं। अब देखना यह होगा कि आइची नागोया की धरती पर भारतीय एथलीट इन उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं। पूरे देश की दुआएं और शुभकामनाएं अपने इन जांबाज़ खिलाड़ियों के साथ हैं।

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