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सेमीकॉन इंडिया 2026 नई दिल्ली में, चिप निर्माण में भारत की बड़ी छलांग

सिद्धार्थ शर्मा सिद्धार्थ शर्मा siddharthsharma.avalw.com · 116 reads Respect0 Save Share Read only
READS8live count PUBLISHED16 Sept2026 READING TIME4 min829 words LANGUAGEHindi
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17 से 19 सितंबर तक नई दिल्ली में सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन हो रहा है, जहां भारत अपनी सेमीकंडक्टर और डिज़ाइन क्षमताओं को दुनिया के सामने रखेगा। सरकारी मिशन के तहत बड़े निवेश और नई परियोजनाएं इस क्षेत्र को तेज़ी से आगे बढ़ा रही हैं।

देश की राजधानी नई दिल्ली एक बार फिर तकनीक की दुनिया का केंद्र बनने जा रही है। सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन यहां हो रहा है, जहां भारत अपनी सेमीकंडक्टर और चिप डिज़ाइन क्षमताओं को दुनिया के सामने रखेगा। बीते कुछ वर्षों में सरकार और उद्योग ने मिलकर इस क्षेत्र में जो गति पकड़ी है, यह आयोजन उसी सफर का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।

सेमीकॉन इंडिया 2026 का मंच

रिपोर्टों के अनुसार सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि केंद्र में हो रहा है। इस बार आयोजन की थीम सिलिकॉन से सिस्टम्स तक, यानी पूरे इकोसिस्टम के निर्माण पर केंद्रित है। यह इसका पांचवां संस्करण है, जिसमें सरकार, सेमीकंडक्टर कंपनियां, निवेशक, शोधकर्ता और दुनिया भर के तकनीकी दिग्गज एक मंच पर आते हैं।

पिछले संस्करण की सफलता ने इस आयोजन की अहमियत और बढ़ा दी है। साल 2025 में 48 देशों और क्षेत्रों से 350 से अधिक प्रदर्शक इसमें शामिल हुए थे। तब लगभग 35 हज़ार पंजीकरण हुए और करीब 30 हज़ार लोग प्रत्यक्ष रूप से पहुंचे थे, जबकि 12 समझौता ज्ञापनों की घोषणा की गई। यह आंकड़े इस क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी को दर्शाते हैं।

तकनीक और कंप्यूटिंग का बढ़ता दायरा। चिप से लेकर एआई तक, भारत अपनी डिजिटल बुनियाद मज़बूत कर रहा है।
तकनीक और कंप्यूटिंग का बढ़ता दायरा। चिप से लेकर एआई तक, भारत अपनी डिजिटल बुनियाद मज़बूत कर रहा है।

सेमीकंडक्टर मिशन और निवेश

भारत सेमीकंडक्टर मिशन इस पूरे प्रयास की रीढ़ है। इसके पहले चरण के लिए 76 हज़ार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इसके बाद जुलाई 2026 में मंज़ूर हुए दूसरे चरण के लिए 1 लाख 27 हज़ार 500 करोड़ रुपये का बड़ा परिव्यय रखा गया है। यह आंकड़े बताते हैं कि सरकार इस क्षेत्र को लेकर कितनी गंभीरता से आगे बढ़ रही है।

मिशन के तहत अब तक छह राज्यों में फैली 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंज़ूरी मिल चुकी है, जिनमें 1 लाख 64 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई है। इनमें से तीन इकाइयां तो व्यावसायिक उत्पादन तक भी पहुंच चुकी हैं। चिप के निर्माण, पैकेजिंग और परीक्षण से जुड़ी यह इकाइयां देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम हैं।

डिज़ाइन और प्रतिभा की नींव

चिप बनाने के साथ उसे डिज़ाइन करने की क्षमता भी उतनी ही ज़रूरी है, और यहां भी काम तेज़ी से हो रहा है। देश के 320 शैक्षणिक संस्थानों में चिप डिज़ाइन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन टूल उपलब्ध कराए गए हैं। अब तक 68 हज़ार से अधिक विद्यार्थियों को इस क्षेत्र का प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिससे भविष्य के लिए एक कुशल पीढ़ी तैयार हो रही है।

डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना के तहत 105 स्टार्टअप और छोटे उद्यमों को सहारा दिया गया है, जबकि 24 डिज़ाइन परियोजनाओं को आर्थिक मदद मिली है। इसका असर भी दिखने लगा है। अप्रैल 2026 तक 75 संस्थानों ने 211 चिप तैयार किए, और अलग अलग नोड पर सात चिप का सफल निर्माण हुआ, जिनमें 12 नैनोमीटर तक के चिप शामिल हैं।

इंडियाएआई मिशन की रफ्तार

सेमीकंडक्टर के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का क्षेत्र भी भारत की प्राथमिकता में है। इंडियाएआई मिशन के लिए लगभग 10 हज़ार 372 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जून 2026 तक साझा कंप्यूटिंग क्षमता बढ़कर 45 हज़ार से अधिक जीपीयू तक पहुंच गई। अगस्त तक 237 परियोजनाओं ने रियायती कंप्यूटिंग का लाभ लिया, जो 93 लाख 18 हज़ार जीपीयू घंटों के बराबर है।

इस मिशन के तहत 20 स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल प्रस्तावों को चुना गया है, जिनमें 12 बड़े मल्टीमॉडल मॉडल और 8 छोटे भाषा मॉडल शामिल हैं। इनका मकसद भारतीय भाषाओं और यहां की ज़रूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित करना है। इसके अलावा एआई कोष मंच पर 14 हज़ार से अधिक डेटासेट और 331 मॉडल उपलब्ध कराए गए हैं।

नवाचार, केंद्र और बुनियादी ढांचा

देश भर में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 58 उत्कृष्टता केंद्रों को मंज़ूरी दी गई है, जिनमें से 22 केंद्र 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू भी हो चुके हैं। अब तक 62 एआई प्रोटोटाइप तैयार हुए हैं और उनमें से 20 को सार्वजनिक संस्थानों में लागू किया जा चुका है। जुलाई 2026 में सुरक्षित और भरोसेमंद एआई से जुड़ी 13 परियोजनाओं को भी हरी झंडी मिली।

इतने बड़े पैमाने पर काम करने के लिए मज़बूत बुनियादी ढांचा भी चाहिए। देश की डेटा सेंटर क्षमता 2020 के 375 मेगावाट से बढ़कर अब 1575 मेगावाट तक पहुंच गई है। यह विस्तार उन भारी भरकम कंप्यूटिंग ज़रूरतों को पूरा करने में मदद करता है, जो आधुनिक चिप डिज़ाइन और एआई मॉडल के प्रशिक्षण के लिए आवश्यक हैं।

लक्ष्य और चुनौतियां

रिपोर्टों के अनुसार भारत का लक्ष्य 2030 तक वैश्विक चिप बाज़ार में पांच प्रतिशत की हिस्सेदारी हासिल करना है। यह लक्ष्य बड़ा है और इसे पाना आसान नहीं होगा। सेमीकंडक्टर का पूरा इकोसिस्टम खड़ा करने के लिए कच्चे माल, आपूर्ति श्रृंखला और विशेषज्ञ प्रतिभा का लंबा तालमेल चाहिए, जो सालों की मेहनत से ही तैयार होता है।

आयोजन की थीम सिलिकॉन से सिस्टम्स तक इसी सोच की ओर इशारा करती है कि केवल चिप बनाना काफी नहीं, बल्कि उस पर आधारित पूरे उत्पाद और प्रणालियां भी देश में विकसित होनी चाहिए। सेमीकॉन इंडिया 2026 इस लंबे सफर का एक पड़ाव है। आने वाले वर्ष ही बताएंगे कि भारत इस रफ्तार को कितना बनाए रख पाता है और वैश्विक तकनीकी व्यवस्था में अपनी जगह कैसे मज़बूत करता है।

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सिद्धार्थ शर्मा 2026-09-16 · 4 min read · 8 reads
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