अकादमी पुरस्कार की अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी के लिए भारत की आधिकारिक फिल्म का चयन जारी है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया 19 सितंबर को नाम की घोषणा करेगा। जानिए पूरी प्रक्रिया और भारत का अब तक का सफर।
हर साल की तरह इस बार भी भारतीय सिनेमा जगत में एक खास सरगर्मी देखी जा रही है। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म सम्मानों में गिने जाने वाले अकादमी पुरस्कार, यानी ऑस्कर के लिए भारत की ओर से कौन सी फिल्म भेजी जाएगी, इस सवाल का जवाब जानने के लिए फिल्म प्रेमी बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म की श्रेणी में हर देश केवल एक ही फिल्म भेज सकता है, इसलिए यह चुनाव बेहद अहम माना जाता है। इस लेख में हम समझेंगे कि भारत की आधिकारिक फिल्म कैसे और कौन चुनता है, इसके लिए क्या शर्तें होती हैं, और इस पूरी प्रक्रिया में अब तक क्या कुछ सामने आया है।
चयन कौन करता है
भारत की ओर से भेजी जाने वाली आधिकारिक फिल्म का चुनाव फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया, यानी एफएफआई करता है। यह संस्था अपनी कार्यकारी समिति के ज़रिए इस पूरी प्रक्रिया की देखरेख करती है और देश भर से आई फिल्मों में से एक फिल्म को अंतिम रूप से चुनने की ज़िम्मेदारी निभाती है।
यह ज़िम्मेदारी इसलिए भी बड़ी है क्योंकि एक ही फिल्म को पूरे देश के सिनेमा का प्रतिनिधित्व करते हुए वैश्विक मंच पर उतरना होता है। ऐसे में चयन को लेकर हर साल खूब चर्चा होती है, और कई बार यह बहस का विषय भी बन जाता है कि आखिर कौन सी फिल्म इस दौड़ की सबसे मज़बूत दावेदार है।
ज़रूरी शर्तें
इस दौड़ में शामिल होने के लिए फिल्मों को कुछ तय शर्तें पूरी करनी होती हैं। नियमों के अनुसार, फिल्म का प्रदर्शन 15 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच होना ज़रूरी है। यानी इसी तय अवधि में रिलीज़ हुई फिल्में ही इस चयन प्रक्रिया का हिस्सा बन सकती हैं।
इसके साथ ही एक और अहम शर्त यह है कि फिल्म को किसी व्यावसायिक सिनेमाघर में लगातार कम से कम सात दिनों तक आम दर्शकों के लिए दिखाया गया हो। इस साल फिल्में जमा कराने की अंतिम तारीख 7 सितंबर तय की गई थी, जिसके बाद अब चयन का चरण शुरू हो चुका है।
चयन की प्रक्रिया
फिल्मों के जमा हो जाने के बाद एफएफआई एक जूरी का गठन करता है, जिसकी अगुवाई एक अध्यक्ष करते हैं और जिसमें सिनेमा से जुड़े वरिष्ठ रचनात्मक लोग शामिल होते हैं। सभी फिल्मों को देखने के बाद, मतदान के ज़रिए यह तय किया जाता है कि किस फिल्म को भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बनाया जाए।
एफएफआई के अध्यक्ष अभय सिन्हा ने कहा है कि संस्था इस बात का पूरा ध्यान रखेगी कि निर्माताओं के लिए यह पूरी प्रक्रिया सहज, लोकतांत्रिक और पारदर्शी बनी रहे। इस आधिकारिक फिल्म के नाम की घोषणा 19 सितंबर को की जाएगी, जिस पर अभी से सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
भारत का लंबा इंतज़ार

यह चयन इसलिए भी भावनात्मक रूप से अहम है क्योंकि इस श्रेणी में भारत का इंतज़ार अब तक बहुत लंबा रहा है। अपने समृद्ध और विशाल फिल्म उद्योग के बावजूद, भारत की ओर से अब तक केवल तीन फिल्में ही इस श्रेणी में नामांकन तक पहुंच पाई हैं, और जीत अब भी एक सपना बनी हुई है।
मदर इंडिया, सलाम बॉम्बे और लगान जैसी फिल्में नामांकन की उस दहलीज़ तक पहुंचीं, जहां तक बहुत कम भारतीय फिल्में जा सकी हैं। यही वजह है कि हर साल जब आधिकारिक फिल्म चुनी जाती है, तो उसके साथ करोड़ों दर्शकों की उम्मीदें और एक बड़ी भावनात्मक पूंजी भी जुड़ जाती है।
19 सितंबर पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे फिल्म जगत की नज़रें उस घोषणा पर टिकी हैं, जिसमें भारत की आधिकारिक फिल्म का नाम सामने आएगा। यह चुनाव न केवल संबंधित फिल्म और उसकी टीम के लिए, बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़े गौरव और अवसर का विषय होता है।
यह प्रक्रिया इस बात की भी याद दिलाती है कि भारतीय सिनेमा कितनी विविधता और गहराई समेटे हुए है, जहां अलग अलग भाषाओं और शैलियों की फिल्में एक ही मंच के लिए दावेदारी करती हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार कौन सी कहानी भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुनी जाती है।
यहाँ फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया के बारे में काफी कुछ सीखा.
फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया पर बहुत अच्छी कवरेज.
शुरू से अंत तक अच्छा लगा.
पूरी तरह सहमत.
बहुत सही.

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