नीरज घायवान की हिंदी फिल्म होमबाउंड को बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी में भारत की आधिकारिक ऑस्कर एंट्री चुना गया है। कान में सराहना पाने वाली इस फिल्म से मार्टिन स्कॉर्सेसी भी जुड़े हैं।
हर साल भारत से एक फिल्म को अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना जाता है। इस बार यह जिम्मेदारी नीरज घायवान की फिल्म होमबाउंड को मिली है, जिसे बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी में भारत की आधिकारिक एंट्री के रूप में भेजा गया है।
यह फिल्म न सिर्फ अपनी कहानी के लिए, बल्कि इससे जुड़े बड़े नामों और अंतरराष्ट्रीय पहचान के कारण भी लगातार चर्चा में बनी हुई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर होमबाउंड को इतना खास और अलग क्यों माना जा रहा है।
भारत की ओर से ऑस्कर की दौड़ में
रिपोर्ट्स के अनुसार होमबाउंड एक हिंदी भाषा की फिल्म है, जिसका निर्देशन नीरज घायवान ने किया है। यह वही निर्देशक हैं जिन्हें संवेदनशील और सामाजिक मुद्दों पर आधारित सिनेमा गढ़ने के लिए खास तौर पर जाना जाता है।
फिल्म में इशान खट्टर, विशाल जेठवा और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में नजर आते हैं। इनके अलावा शालिनी वत्स और श्रीधर दुबे जैसे कलाकार भी इस कहानी का हिस्सा हैं, जो इसे और अधिक मजबूत तथा भरोसेमंद बनाते हैं।
कान से मिली पहचान

रिपोर्ट्स के मुताबिक होमबाउंड ने अपनी शुरुआत कान फिल्म फेस्टिवल से की थी, जहां इसे आलोचकों की खूब सराहना मिली। किसी भारतीय फिल्म के लिए इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
इस तरह के प्रतिष्ठित फेस्टिवल में प्रदर्शित होना किसी भी फिल्म के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है। यहीं से होमबाउंड की चर्चा धीरे-धीरे दुनिया भर में फैलनी शुरू हुई और इसे लेकर दर्शकों की उम्मीदें भी लगातार बढ़ती चली गईं।
मार्टिन स्कॉर्सेसी का जुड़ाव
फिल्म से जुड़ा एक और बड़ा नाम इसे बेहद खास बना देता है। रिपोर्ट्स के अनुसार होमबाउंड को धर्मा प्रोडक्शंस ने बनाया है, जबकि मशहूर हॉलीवुड निर्देशक मार्टिन स्कॉर्सेसी इसके एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के रूप में इससे जुड़े हुए हैं।
स्कॉर्सेसी जैसे दिग्गज फिल्मकार का किसी भारतीय फिल्म से जुड़ना अपने आप में एक बड़ी बात है। यह जुड़ाव न केवल फिल्म की साख को बढ़ाता है, बल्कि इसे दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने में भी काफी मदद करता है।
एक सच्ची घटना से प्रेरित कहानी
होमबाउंड की कहानी की जड़ें एक वास्तविक घटना में हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार यह फिल्म पत्रकार बशारत पीर के साल 2020 के एक न्यूयॉर्क टाइम्स लेख से प्रेरित है, जो दो दोस्तों की एक लंबी और बेहद कठिन यात्रा पर आधारित था।
बताया गया है कि यह कहानी 2020 के पहले लॉकडाउन के दौरान करीब पंद्रह सौ किलोमीटर की पैदल यात्रा करते दो दोस्तों की एक तस्वीर से प्रेरित है। फिल्म दो युवाओं के उन सामाजिक बंधनों से मुक्त होने के संघर्ष को दिखाती है, जिन्होंने उनके जीवन को सीमित कर रखा है।
फिल्म फेडरेशन का फैसला
भारत की आधिकारिक एंट्री चुनने की जिम्मेदारी फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसी संस्था ने होमबाउंड को बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी के लिए देश की ओर से आधिकारिक एंट्री के रूप में चुना है।
बताया गया है कि यह फैसला चौदह सदस्यों वाली एक जूरी ने लिया, जिसकी अध्यक्षता फिल्मकार एन. चंद्रा ने की। खास बात यह रही कि जूरी ने यह चुनाव सर्वसम्मति से किया, यानी इसके सभी सदस्य इस नाम पर पूरी तरह एकमत थे।
भारतीय सिनेमा के लिए मायने
होमबाउंड का इस मुकाम तक पहुंचना भारतीय सिनेमा के लिए एक बेहद अहम पल है। कान में मिली सराहना, स्कॉर्सेसी का साथ और एक सच्ची कहानी का दमदार चित्रण, ये सभी बातें मिलकर इस फिल्म को खास बनाती हैं और दर्शकों की उम्मीदों को और बढ़ा देती हैं।
यहाँ कान फिल्म फेस्टिवल के बारे में काफी कुछ सीखा.
सच.