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टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में भारत: सात फिल्में, मगर कोई बड़ी मुख्यधारा हिंदी फिल्म नहीं

सान्या राव सान्या राव sanyarao.avalw.com · 98 reads Respect0 Save Share Read only
READS750live count PUBLISHED8 Sept2026 READING TIME3 min643 words LANGUAGEHindi
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टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2026 में भारत की सात फिल्में दिखाई जा रही हैं, जिनमें मलयालम, तमिल और पूर्वोत्तर की भाषाओं का सिनेमा शामिल है। इस बार किसी बड़ी मुख्यधारा हिंदी फिल्म की गैरमौजूदगी और क्षेत्रीय सिनेमा की विविधता पर एक नज़र।

भारतीय सिनेमा जब किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचता है, तो वह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि देश की संस्कृति और कहानियों का प्रतिनिधित्व भी करता है। इसी कड़ी में इस साल टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भारत की मौजूदगी एक दिलचस्प तस्वीर पेश कर रही है, जो कई मायनों में सामान्य से अलग है।

इस बार की सबसे बड़ी बात यह है कि भारत की ओर से चुनी गई फिल्मों में बड़ी मुख्यधारा हिंदी फिल्मों की जगह क्षेत्रीय और स्वतंत्र सिनेमा को प्रमुखता मिली है। इस लेख में हम जानेंगे कि टोरंटो में भारत की कौन कौन सी फिल्में हैं, इस बदलाव के पीछे क्या वजह है, और यह हमारे सिनेमा के बारे में क्या कहता है।

टोरंटो में भारत की मौजूदगी

टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, जिसे टीआईएफएफ भी कहा जाता है, दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में गिना जाता है। इसका इक्यावनवां संस्करण इस साल 10 से 20 सितंबर तक आयोजित हो रहा है, और इसमें भारत की कुल सात फिल्मों को जगह मिली है।

ये सात फिल्में किसी एक भाषा या शैली तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत की भाषाई विविधता को बखूबी दर्शाती हैं। इनमें मलयालम और तमिल सिनेमा के साथ साथ, पूर्वोत्तर के नागालैंड की कोन्याक भाषा में बनी फिल्म तक शामिल है, जो इस चयन को और भी खास बना देती है।

मुख्यधारा हिंदी फिल्म की गैरमौजूदगी

इस बार के चयन में एक बात जो सबसे ज़्यादा चर्चा में है, वह है किसी बड़ी मुख्यधारा हिंदी फिल्म का न होना। रिपोर्ट के अनुसार, इसकी वजह हिंदी भाषा के प्रति रुचि की कमी नहीं, बल्कि समय सारिणी का तालमेल न बैठ पाना बताई गई है, क्योंकि बड़ी फिल्मों की रिलीज़ की तारीखें महोत्सव के कार्यक्रम से मेल नहीं खा पाईं।

इसका मतलब यह कतई नहीं कि हिंदी सिनेमा पूरी तरह अनुपस्थित है, क्योंकि चयन में हिंदी भाषा की फिल्म भी शामिल है। लेकिन बड़े सितारों वाली व्यावसायिक फिल्मों की जगह इस बार छोटी और स्वतंत्र फिल्मों के मिलने से, महोत्सव में भारत की तस्वीर कुछ अलग और ताज़ा नज़र आ रही है।

क्षेत्रीय सिनेमा की विविधता

फिल्म महोत्सव अलग अलग भाषाओं और शैलियों की कहानियों को दुनिया के सामने लाने का बड़ा मंच बनते हैं।
फिल्म महोत्सव अलग अलग भाषाओं और शैलियों की कहानियों को दुनिया के सामने लाने का बड़ा मंच बनते हैं।

इस बार के भारतीय चयन का एक बड़ा आकर्षण तमिल फिल्म डोरोथी है, जिसका निर्देशन कार्तिक सुब्बाराज ने किया है और जिसे प्रसिद्ध निर्माता गुनीत मोंगा ने बनाया है। यह फिल्म महोत्सव के प्रतिष्ठित सेंटरपीस खंड का हिस्सा है, जहां चुनिंदा और खास फिल्मों को जगह दी जाती है।

इसके अलावा मलयालम फिल्म हाफ को महोत्सव के मिडनाइट मैडनेस खंड में जगह मिली है, जो आमतौर पर रोमांचक और अलग तरह की फिल्मों के लिए जाना जाता है। वहीं नागालैंड की कोन्याक भाषा में बनी फिल्म आंग को प्लेटफॉर्म खंड में चुना गया है, जो नए निर्देशकों की प्रतिभा को सामने लाता है।

क्लासिक और नई आवाज़ें

इस चयन की एक और खास बात यह है कि इसमें सिर्फ नई फिल्में ही नहीं हैं। साल 1986 में बनी मलयालम फिल्म अम्मा अरियन का पुनर्निर्मित यानी रिस्टोर किया हुआ संस्करण भी दिखाया जा रहा है, जो भारतीय सिनेमा की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक अहम प्रयास है।

नई और पुरानी फिल्मों के इस मेल के साथ, चयन में कुछ लघु फिल्में भी शामिल हैं, जो युवा और उभरते फिल्मकारों को अपनी बात कहने का अवसर देती हैं। इस तरह यह चयन एक ही समय में भारतीय सिनेमा के अतीत, वर्तमान और भविष्य को एक साथ मंच पर लाता है।

वैश्विक मंच पर विविधता

इस साल भारत के चयन को लेकर महोत्सव की ओर से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया आई है। कार्यक्रम की निदेशक रॉबिन सिटीज़न के अनुसार, इस बार भारत से आई प्रविष्टियां अपनी कहानी कहने के अंदाज़ और शैली में बेहद अलग अलग थीं, जो देश के सिनेमा की गहराई को दर्शाती हैं।

कुल मिलाकर, टोरंटो में भारत की यह मौजूदगी इस बात का संकेत है कि हमारे सिनेमा की असली ताकत सिर्फ बड़े बजट या सितारों में नहीं, बल्कि उसकी अपार विविधता में छिपी है। अलग अलग भाषाओं और क्षेत्रों की ये कहानियां जब वैश्विक मंच तक पहुंचती हैं, तो पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन जाती हैं।

1 responses

क्षेत्रीय फिल्में पर बहुत अच्छी कवरेज.

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सान्या राव 2026-09-08 · 3 min read · 750 reads
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