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आईपीओ की बाढ़: कैसे 2025 बना भारतीय बाजार के लिए रिकॉर्ड साल

आदित्य बोस आदित्य बोस adityabose.avalw.com · 643 reads Respect0 Save Share Read only
READS34live count PUBLISHED21 Sept2026 READING TIME4 min718 words LANGUAGEHindi
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रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में भारतीय बाजार में 373 आईपीओ आए, जिन्होंने करीब 1.95 लाख करोड़ रुपये जुटाए। 18 साल में पहली बार मेनबोर्ड सूचीबद्धता सौ के पार गई, और टाटा कैपिटल जैसे बड़े नामों ने इतिहास रच दिया।

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भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता साल किसी बड़े उत्सव से कम नहीं रहा। दलाल स्ट्रीट पर नई कंपनियों के बाजार में उतरने यानी आईपीओ की मानो एक बाढ़ सी आ गई, और इसके साथ ही आम निवेशकों का उत्साह भी अपने चरम पर देखा गया। हाल में सामने आए आंकड़े इस बात की पूरी तरह पुष्टि करते हैं कि यह वाकई एक ऐतिहासिक वर्ष साबित हुआ है।

रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े

सबसे पहले नजर डालते हैं उन आंकड़ों पर, जिन्होंने बाजार से जुड़े लगभग सभी लोगों को चौंका दिया। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 के दौरान भारतीय बाजार में कुल मिलाकर 373 आईपीओ आए, जिनके जरिए कंपनियों ने बाजार से लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि जुटाई, जो अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है।

इन आईपीओ की भीतरी संरचना पर गौर करें तो तस्वीर और भी दिलचस्प हो जाती है। आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 103 आईपीओ बड़े यानी मेनबोर्ड श्रेणी के थे, जबकि बाकी 270 आईपीओ छोटे और मझोले उद्यमों यानी एसएमई श्रेणी से जुड़े रहे, जो हर आकार की कंपनियों की व्यापक भागीदारी को साफ दर्शाता है।

18 साल का रिकॉर्ड

कंपनियों के बाजार में उतरने और निवेशकों के बढ़ते भरोसे ने प्राथमिक बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।
कंपनियों के बाजार में उतरने और निवेशकों के बढ़ते भरोसे ने प्राथमिक बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।

इस जबरदस्त तेजी ने एक बेहद पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। रिपोर्ट के अनुसार, पूरे 18 साल में यह पहली बार हुआ जब किसी एक ही साल में मेनबोर्ड श्रेणी में सूचीबद्ध होने वाली कंपनियों की संख्या सौ के आंकड़े को पार कर गई, और इन बड़ी कंपनियों ने मिलकर करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये तक जुटा लिए।

इस शानदार प्रदर्शन ने भारत को वैश्विक मानचित्र पर भी एक खास जगह दिला दी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन्हीं आंकड़ों के दम पर भारत साल 2025 में दुनिया के सबसे सक्रिय आईपीओ बाजारों में से एक के रूप में उभरा, जो देश की अर्थव्यवस्था में लगातार बढ़ते भरोसे की ओर स्पष्ट इशारा करता है।

बड़े नाम, बड़े इश्यू

इस साल कुछ बहुत बड़े नामों ने भी बाजार में जोरदार दस्तक दी। आंकड़ों के अनुसार, टाटा कैपिटल का करीब 15,510 करोड़ रुपये का आईपीओ भारतीय इतिहास का चौथा सबसे बड़ा आईपीओ रहा, जिसने यह साबित कर दिया कि बाजार अब कितने विशाल इश्यू को भी बड़ी आसानी से आत्मसात कर सकता है।

एक और बड़ा रिकॉर्ड इस बार बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ा रहा। जानकारी के अनुसार, एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज का जून महीने में आया करीब 12,500 करोड़ रुपये का आईपीओ, किसी बैंक से जुड़ी कंपनी का भारत में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन गया, जो इस पूरे क्षेत्र की मजबूती को बखूबी दर्शाता है।

सिर्फ बड़ी कंपनियां नहीं

हालांकि यह पूरी तेजी केवल चंद बड़ी कंपनियों तक ही सीमित नहीं रही। जानकारों के अनुसार, इस साल की सबसे खास बात यही रही कि पूंजी जुटाने का यह सिलसिला बड़े नामों से आगे बढ़कर मझोली और उभरती हुई कंपनियों तक भी पहुंचा, जो अपने विकास के अलग अलग चरणों में बाजार का रुख कर रही थीं।

इस तेजी के पीछे

आखिर इस अभूतपूर्व उछाल की असली वजह क्या रही? जानकारों के अनुसार, इसके पीछे शेयर बाजार का मजबूत प्रदर्शन, आम निवेशकों की लगातार बढ़ती भागीदारी और कंपनियों की विस्तार के लिए पूंजी जुटाने की तीव्र इच्छा जैसे कई कारक एक साथ काम कर रहे थे, जिन्होंने पूरे माहौल को और गर्म कर दिया।

इस पूरी प्रक्रिया का महत्व केवल कंपनियों तक ही सीमित नहीं है। दरअसल, जब कंपनियां बाजार से पूंजी जुटाती हैं, तो यह धन आगे चलकर नए कारखानों, रोजगार और कारोबार के विस्तार में लगता है, जिससे यह प्राथमिक बाजार पूरी अर्थव्यवस्था के विकास का एक बेहद अहम इंजन बन जाता है।

आगे की राह

आने वाले साल को लेकर भी उम्मीदें फिलहाल काफी ऊंची बनी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में प्राथमिक बाजार के जरिए करीब 4 लाख करोड़ रुपये तक की पूंजी जुटाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है, जो इस बात का साफ संकेत है कि यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है।

हालांकि इस चौतरफा उत्साह के बीच सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। जानकार अक्सर याद दिलाते हैं कि हर आईपीओ मुनाफे की गारंटी नहीं होता, और इस साल भी सूचीबद्ध हुई कंपनियों के प्रदर्शन में काफी अंतर देखा गया, इसलिए निवेशकों को हमेशा सोच समझकर ही कदम आगे बढ़ाना चाहिए।

बहरहाल, कुल मिलाकर बीता साल भारतीय प्राथमिक बाजार के लिए एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। रिकॉर्ड तोड़ते ये तमाम आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय कंपनियों और निवेशकों, दोनों का ही देश की विकास गाथा पर भरोसा लगातार और मजबूत होता जा रहा है।

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आदित्य बोस 2026-09-21 · 4 min read · 34 reads
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