रिपोर्ट के अनुसार भारत की यूपीआई प्रणाली ने जुलाई में तेईस अरब से अधिक लेनदेन के साथ नया रिकॉर्ड बनाया। दुनिया की सबसे बड़ी रीयल टाइम भुगतान प्रणाली बन चुकी यूपीआई का दायरा छोटे शहरों और गांवों तक तेजी से फैल रहा है।
भारत में डिजिटल भुगतान का चलन अब रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुका है। छोटी दुकान से लेकर बड़े बाजार तक, मोबाइल फोन से पैसे भेजना और लेना इतना आसान हो गया है कि नकद का इस्तेमाल तेजी से घटता जा रहा है, और इसी बदलाव ने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींचा है।
डिजिटल भुगतान का नया रिकॉर्ड
रिपोर्ट के अनुसार इस साल भारत की एकीकृत भुगतान प्रणाली यानी यूपीआई ने एक और नया रिकॉर्ड बना डाला। बताया जा रहा है कि जुलाई महीने में इसके जरिए तेईस अरब से भी अधिक लेनदेन हुए, जो अब तक किसी एक महीने में हुआ सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार इससे पहले मई महीने में भी एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड बना था। खबरों के मुताबिक उस दौरान यूपीआई के जरिए करीब तीस लाख करोड़ रुपये मूल्य के लेनदेन हुए थे, जिसे जुलाई के आंकड़ों ने पीछे छोड़ते हुए एक नई ऊंचाई हासिल कर ली।
हर महीने बढ़ते आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार यूपीआई से होने वाले लेनदेन का कुल मूल्य लगातार बढ़ता ही जा रहा है। बताया जा रहा है कि पिछले साल की तुलना में इसमें करीब उन्नीस प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि पिछले महीने के मुकाबले भी इसमें अच्छी खासी वृद्धि देखने को मिली।
खबरों के मुताबिक पूरे वित्त वर्ष के दौरान लेनदेन की संख्या में तेज उछाल आया है। बताया जा रहा है कि इसकी वृद्धि दर करीब तीस प्रतिशत रही, जो साफ दिखाता है कि आम लोग अब पहले से कहीं ज्यादा भरोसे के साथ डिजिटल तरीके से भुगतान करने लगे हैं।
दुनिया में सबसे आगे

रिपोर्ट के अनुसार यूपीआई आज दुनिया की सबसे बड़ी रीयल टाइम भुगतान प्रणाली बन चुकी है। बताया जा रहा है कि दुनिया भर में होने वाले तत्काल डिजिटल लेनदेन का करीब आधा हिस्सा अकेले भारत की इसी एक प्रणाली के जरिए पूरा किया जा रहा है, जो अपने आप में बड़ी बात है।
खबरों के मुताबिक यह उपलब्धि भारत की तकनीकी ताकत को भी बखूबी दर्शाती है। बताया जा रहा है कि कई देश अब भारत के इस मॉडल को समझने और अपने यहां लागू करने में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं, जिससे इसकी पहुंच देश की सीमाओं के पार भी बढ़ती जा रही है।
गांवों और छोटे शहरों की भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार इस तेज वृद्धि के पीछे छोटे शहरों और गांवों की बहुत बड़ी भूमिका रही है। बताया जा रहा है कि अब दूरदराज के इलाकों में भी लोग मोबाइल से भुगतान करने लगे हैं, जिससे डिजिटल लेनदेन का दायरा लगातार और तेजी से फैलता जा रहा है।
खबरों के मुताबिक सस्ते स्मार्टफोन और आसान इंटरनेट ने इस पूरे बदलाव को और तेज कर दिया है। बताया जा रहा है कि छोटे दुकानदार से लेकर सब्जी बेचने वाले तक अब क्यूआर कोड के जरिए भुगतान लेने लगे हैं, जो कुछ साल पहले तक किसी कल्पना जैसा ही लगता था।
एक दशक में जबरदस्त उछाल
रिपोर्ट के अनुसार पिछले करीब एक दशक में इस प्रणाली ने बिल्कुल असाधारण वृद्धि दर्ज की है। बताया जा रहा है कि जहां शुरुआती वर्षों में लेनदेन का कुल मूल्य बेहद कम हुआ करता था, वहीं अब यह बढ़कर उससे कई हजार गुना अधिक हो चुका है।
खबरों के मुताबिक इतनी तेज रफ्तार से बढ़ने वाली कोई भी भुगतान प्रणाली दुनिया में बहुत कम ही देखने को मिलती है। बताया जा रहा है कि यही असाधारण रफ्तार और लोगों का भरोसा मिलकर इस प्रणाली को और अधिक खास तथा भरोसेमंद बना देते हैं।
आगे की राह
रिपोर्ट के अनुसार आने वाले वर्षों में डिजिटल भुगतान का यह चलन और अधिक मजबूत होने की पूरी उम्मीद है। जानकारों के अनुसार जैसेजैसे तकनीक और बेहतर होती जाएगी, वैसेवैसे नकद पर लोगों की निर्भरता भी धीरेधीरे और कम होती चली जाएगी।
खबरों के मुताबिक विशेषज्ञ यह भी बार बार याद दिलाते हैं कि इतनी बड़ी प्रणाली की सुरक्षा उतनी ही अधिक जरूरी है। बताया जा रहा है कि लेनदेन जितना आसान होता जाएगा, उपयोगकर्ताओं को उतनी ही अधिक सावधानी और सतर्कता के साथ इसका इस्तेमाल करना चाहिए।

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