टेलीविजन से लेकर अखबारों तक, हर जगह छाया रहने वाला सेंसेक्स आखिर है क्या? जानिए देश की तीस सबसे बड़ी कंपनियों, एशिया के सबसे पुराने शेयर बाजार और भारतीय अर्थव्यवस्था की इस जीवंत धड़कन की पूरी कहानी।
जब भी भारत की अर्थव्यवस्था की सेहत को लेकर कोई बड़ी खबर आती है, तो अक्सर एक शब्द बार बार सुनाई देता है, और वह है सेंसेक्स। टेलीविजन के पर्दे से लेकर अखबारों के पहले पन्ने तक, यह छोटा सा शब्द करोड़ों भारतीयों के मन में उम्मीद, उत्साह और कभी कभी हल्की सी चिंता का भाव भी एक साथ जगा देता है। लेकिन आखिर यह सेंसेक्स है क्या, और यह पूरे देश की आर्थिक धड़कन को इतनी सटीकता के साथ कैसे बयान कर पाता है, यह जानना वाकई बेहद दिलचस्प है।
भारतीय बाजार की धड़कन
सेंसेक्स को अक्सर भारतीय शेयर बाजार की नब्ज कहा जाता है, और यह उपमा वाकई में बिल्कुल सटीक भी बैठती है। जिस तरह एक अनुभवी डॉक्टर नब्ज देखकर ही किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य का अंदाजा लगा लेता है, ठीक उसी तरह जानकार लोग सेंसेक्स की चाल को देखकर पूरी अर्थव्यवस्था के मिजाज को भाँप लेते हैं। जब यह ऊपर चढ़ता है तो माना जाता है कि निवेशकों का भरोसा मजबूत है, और जब यह गिरता है तो बाजार में बेचैनी का साफ संकेत मिलता है।
यही कारण है कि देश और विदेश के निवेशक, कारोबारी और नीति निर्माता, सभी इस पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रखते हैं। एक आम व्यक्ति के लिए भी, जिसका शायद शेयर बाजार से कोई सीधा लेना देना न हो, सेंसेक्स की चाल एक तरह से पूरे आर्थिक माहौल का तापमान बता देती है। यही वजह है कि यह महज कुछ सूखे आँकड़ों का समूह न होकर, देश की आर्थिक भावनाओं का एक जीवंत और धड़कता हुआ प्रतीक बन गया है।
सेंसेक्स आखिर है क्या
अपने मूल रूप में, सेंसेक्स दरअसल देश की तीस सबसे बड़ी और सबसे भरोसेमंद कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन को मापने वाला एक सूचकांक है। ये सभी कंपनियाँ देश के सबसे पुराने शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं और अपने अपने क्षेत्रों की अगुआ मानी जाती हैं। इन तीस कंपनियों के शेयरों की कीमत मिलकर एक संख्या तैयार करती है, और उसी संख्या के ऊपर या नीचे होने को ही हम आम बोलचाल में सेंसेक्स का चढ़ना या गिरना कहते हैं।
इस प्रसिद्ध सूचकांक की औपचारिक शुरुआत उन्नीस सौ छियासी में हुई थी, हालाँकि इसकी गणना का आधार वर्ष उससे भी कुछ साल पहले का रखा गया था। उस समय इसे मात्र सौ के एक सामान्य आधार मूल्य से शुरू किया गया था, और वहीं से इसकी एक लंबी ऐतिहासिक यात्रा की नींव पड़ी। तब से लेकर आज तक, इसने देश की अर्थव्यवस्था के हर छोटे बड़े उतार चढ़ाव को अपने भीतर दर्ज करते हुए एक बेहद लंबा और घटनापूर्ण सफर तय किया है।
एशिया का सबसे पुराना शेयर बाजार

सेंसेक्स जिस बाजार से जुड़ा हुआ है, यानी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, उसका अपना इतिहास भी कुछ कम रोमांचक नहीं है। इसकी स्थापना आज से लगभग डेढ़ सौ साल पहले, अठारह सौ पचहत्तर में हुई थी, जो इसे पूरे एशिया का सबसे पुराना शेयर बाजार होने का गौरव प्रदान करती है। मुंबई की मशहूर दलाल स्ट्रीट पर स्थित यह बाजार समय के साथ भारतीय वित्तीय जगत का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बनता चला गया।
अपनी बिल्कुल शुरुआत में यह कुछ दलालों के एक साधारण समूह से ज्यादा कुछ नहीं था, जो एक पेड़ के नीचे बैठकर आपस में शेयरों का लेनदेन किया करते थे। लेकिन देखते ही देखते यह छोटा सा समूह एक विशाल और बेहद आधुनिक संस्था में बदल गया। आज इस बाजार में हजारों की संख्या में कंपनियाँ सूचीबद्ध हैं और इसका नाम दुनिया के सबसे बड़े और सबसे प्रभावशाली शेयर बाजारों में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है।
कैसे होती है गणना
बहुत से लोग अक्सर यह सोचते हैं कि सेंसेक्स की गणना शायद बहुत उलझी हुई और जटिल होगी, लेकिन इसके पीछे का मूल विचार असल में काफी सरल और सीधा है। यह सूचकांक उन चुनिंदा कंपनियों के बाजार मूल्य के आधार पर तैयार किया जाता है, लेकिन इसमें केवल उन्हीं शेयरों को गिना जाता है जो वास्तव में आम लोगों के खरीदने और बेचने के लिए खुले बाजार में सहजता से उपलब्ध रहते हैं।
इसका सीधा सा मतलब यह है कि किसी कंपनी के वे शेयर, जो उसके संस्थापकों या प्रवर्तकों के पास बंद पड़े रहते हैं, इस खास गणना में शामिल नहीं किए जाते। यह तरीका यह सुनिश्चित करता है कि सूचकांक हमेशा बाजार की असली और सक्रिय स्थिति को ही दर्शाए। स्वाभाविक रूप से बड़ी कंपनियों का इस पर असर अधिक होता है, क्योंकि खुले बाजार में उनके शेयरों का कुल मूल्य भी उतना ही बड़ा होता है।
अर्थव्यवस्था का आईना
सेंसेक्स की सबसे बड़ी खूबी शायद यही है कि इसमें शामिल तीस कंपनियाँ मिलकर देश के लगभग हर प्रमुख क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। इनमें बैंकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी से लेकर दवा, वाहन, ऊर्जा और रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली कंपनियाँ तक शामिल हैं। इसी व्यापक विविधता के कारण, इन चुनिंदा कंपनियों की सेहत को देखकर पूरी अर्थव्यवस्था की एक बड़ी और भरोसेमंद तस्वीर का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इस पूरे बाजार का आकार भी बीते वर्षों में लगभग अकल्पनीय रूप से बढ़ा है। हाल ही के आँकड़ों के अनुसार, इस शेयर बाजार में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार मूल्य बढ़कर चार सौ अस्सी लाख करोड़ रुपये के विशाल और चौंका देने वाले स्तर तक पहुँच चुका है। यही कारण है कि आज भारत का यह बाजार दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों की अग्रिम पंक्ति में पूरे आत्मविश्वास के साथ खड़ा नजर आता है।
आम निवेशक और भविष्य
बीते कुछ वर्षों में एक बेहद सुखद और उल्लेखनीय बदलाव यह आया है कि अब केवल बड़े और अमीर निवेशक ही नहीं, बल्कि आम मध्यम वर्गीय परिवार भी बड़ी संख्या में शेयर बाजार की ओर रुख कर रहे हैं। तकनीक के बेहद आसान हो जाने और लगातार बढ़ती जागरूकता के कारण, अब कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल फोन से ही बाजार में छोटी छोटी रकम का निवेश शुरू कर सकता है, जो पहले इतना सरल कभी नहीं था।
हालाँकि, अनुभवी जानकार हमेशा यही सलाह देते हैं कि शेयर बाजार में निवेश हमेशा सोच समझकर और पूरी जानकारी के साथ ही करना चाहिए, क्योंकि इसमें उतार चढ़ाव आना एक बिल्कुल स्वाभाविक बात है। फिर भी, सेंसेक्स और इसके पीछे खड़ा यह विशाल बाजार, भारत की आर्थिक प्रगति की कहानी का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में भी यह देश की तरक्की की धड़कन को यूँ ही निरंतर मापता रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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