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विदेशों से भारत आने वाले पैसे का रिकॉर्ड, आंकड़ों के पीछे छिपी प्रवासी कामगारों की अनकही मेहनत

आदित्य बोस आदित्य बोस adityabose.avalw.com · 230 reads Respect0 Save Share Read only
READS690live count PUBLISHED11 Sept2026 READING TIME4 min718 words LANGUAGEHindi
AI CITATIONS? Gathering data

ताज़ा आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक भारत दुनिया में सबसे ज्यादा रेमिटेंस पाने वाला देश बना हुआ है, वित्त वर्ष पच्चीस में करीब 135 अरब डॉलर। पैसा भेजने वालों की बदलती तस्वीर, अमेरिका से यूएई तक की हिस्सेदारी और अर्थव्यवस्था के मायने, सुर्खियों से बाहर रह गए कामगारों की नज़र से।

बड़ी-बड़ी आर्थिक सुर्खियों में अक्सर सिर्फ आंकड़े ही चमकते हैं, मगर उन आंकड़ों के पीछे खड़े इंसान अनदेखे रह जाते हैं। विदेशों से भारत आने वाले पैसे यानी रेमिटेंस की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसके केंद्र में वे लाखों प्रवासी कामगार हैं जो घर से दूर रहकर अपनों के लिए हर महीने कुछ न कुछ भेजते रहते हैं।

ताज़ा आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक भारत एक बार फिर दुनिया में सबसे ज्यादा रेमिटेंस पाने वाला देश बना हुआ है। वित्त वर्ष पच्चीस में देश में विदेशों से करीब एक सौ पैंतीस अरब डॉलर से भी ज्यादा की राशि आई, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है और देश के बाहरी खातों को एक ठोस मजबूती देती है।

दुनिया में सबसे आगे भारत

यह राशि इतनी बड़ी है कि इस मामले में भारत दुनिया के बाकी सभी देशों से आगे खड़ा है। विदेशों में काम कर रहे भारतीय हर साल जो पैसा अपने घर भेजते हैं, वह न सिर्फ उनके अपने परिवारों की, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था की एक बेहद मजबूत और भरोसेमंद नींव बन चुका है।

आम परिवारों के स्तर पर यही पैसा किसी जीवनरेखा से कम नहीं होता। कहीं इससे बच्चों की पढ़ाई का खर्च चलता है, तो कहीं बुजुर्गों के इलाज और घर की मरम्मत का इंतजाम होता है। छोटे शहरों और गांवों तक पहुंचने वाली यह रकम कई बार वहां की पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था को थामे रखती है।

पैसा भेजने वालों की बदलती तस्वीर

विदेशों में मेहनत करने वाले भारतीय हर महीने जो रकम घर भेजते हैं, वही देश के बाहरी खातों और करोड़ों परिवारों की एक मजबूत नींव बनती है।
विदेशों में मेहनत करने वाले भारतीय हर महीने जो रकम घर भेजते हैं, वही देश के बाहरी खातों और करोड़ों परिवारों की एक मजबूत नींव बनती है।

भारतीय रिज़र्व बैंक के रेमिटेंस पर हुए ताज़ा सर्वेक्षण से पता चलता है कि पैसा भेजने वालों की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। यह बदलाव सिर्फ इस बात में नहीं है कि पैसा कहां से आ रहा है, बल्कि इसमें भी है कि वह किस तरह के कामगारों के जरिए और किन माध्यमों से होकर भारत तक पहुंच रहा है।

पहले जहां खाड़ी के देशों में काम करने वाले श्रमिकों का हिस्सा सबसे बड़ा माना जाता था, वहीं अब विकसित देशों का योगदान लगातार बढ़ता जा रहा है। सर्वेक्षण के मुताबिक यह रुझान इस ओर इशारा करता है कि अब कुशल और पेशेवर भारतीय कामगारों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा अहम होती जा रही है।

कहां से आता है सबसे ज़्यादा पैसा

सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि रेमिटेंस भेजने में अब अमेरिका सबसे आगे है, जहां से करीब 27.7 प्रतिशत राशि भारत आती है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात से लगभग 19.2 प्रतिशत, ब्रिटेन से करीब 10.8 प्रतिशत और सिंगापुर से तकरीबन 6.6 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की गई है।

इन आंकड़ों में अपने आप में एक पूरी कहानी छिपी हुई है। खाड़ी के देशों में मेहनत-मजदूरी करने वाले कामगारों की पुरानी तस्वीर के साथ-साथ, अब अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे देशों में बसे पढ़े-लिखे और पेशेवर भारतीयों की एक नई तस्वीर भी उभरकर सामने आ रही है।

सुर्खियों से बाहर की कहानियां

इन बड़े प्रतिशतों और अरबों डॉलर के बीच वे इंसान अक्सर कहीं खो जाते हैं, जिनकी मेहनत के दम पर यह पूरा सिलसिला चलता है। कोई दुबई की तपती धूप में किसी निर्माण स्थल पर काम कर रहा है, तो कोई अमेरिका के किसी दफ्तर में, मगर दोनों के मन में एक ही बात रहती है, घर पर बैठे अपने परिवार की बेहतरी।

यही पैसा चुपचाप समुद्रों और सीमाओं को पार करता हुआ किसी दूर के गांव या कस्बे तक पहुंचता है। जिस परिवार को यह मिलता है, उसके लिए यह महज एक बैंक ट्रांजैक्शन नहीं, बल्कि किसी अपने की दूर से भेजी गई मेहनत, त्याग और उम्मीद का एक ठोस रूप होता है।

अर्थव्यवस्था के लिए मायने

देश की अर्थव्यवस्था के नजरिए से भी यह रकम बेहद अहम मानी जाती है। यह विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती देती है, बाहरी खातों को संतुलित रखने में मदद करती है और व्यापार घाटे के दबाव को कुछ हद तक कम कर देती है, जिससे देश की समग्र वित्तीय स्थिति को एक अहम सहारा मिलता है।

पैसा भेजने के तरीके भी अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो गए हैं। डिजिटल माध्यमों और बैंकिंग तकनीक के विस्तार ने इस पूरी प्रक्रिया को न सिर्फ काफी सस्ता बनाया है, बल्कि अब यह रकम कुछ ही पलों में सीमापार से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते तक पहुंच जाती है।

आंकड़ों के पीछे इंसान

एक पत्रकार के तौर पर मेरी दिलचस्पी हमेशा उन कहानियों में रही है, जो अक्सर सुर्खियों से बाहर रह जाती हैं। रेमिटेंस का यह रिकॉर्ड आंकड़ा अपनी जगह अहम है, मगर उसके पीछे बसे लाखों प्रवासी कामगारों की चुपचाप की गई मेहनत ही, मेरी नजर में, इस पूरी कहानी का असली नायक है।

4 responses

यहाँ विदेशी धन के बारे में काफी कुछ सीखा.

4

विवरण के लिए धन्यवाद.

2

विदेशी धन का अच्छा विश्लेषण.

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सहमत हूँ.

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आदित्य बोस 2026-09-11 · 4 min read · 690 reads
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